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अलौकिक अयोध्या में अद्वितीय अभिनंदन, ayodhya abhinndann

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दबंग दुनिया                          अलौकिक अयोध्या में अद्वितीय अभिनंदन                                                                                  डॉ.ब्रह्मदीप अलूने                                                                    अयोध्या का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि अनादिकाल से जब भी भारत के तीर्थों का उल्लेख होता है तब उसमें सर्वप्रथम अयोध्या का ही नाम आता है। दरअसल अयोध्या भारतीय सभ्यता और संस्कृति की वह धरोहर और पहचान है से जिसमें   भारतवर्ष और यहां के निवासियों का जीवन दर्शन प्रतिबिम्बित होता है। सुख शांति और ऐश्वर्य की इस भूमि के बारे में कहा जाता है कि जहां कभी युद्द न होता उस भूमि को अयोध्या कहते है । भारतीय सभ्यता के विकास में सप्तपुरी का बड़ा योगदान माना जाता है और अयोध्या उन सप्तपुरियों में शामिल है जहां मोक्ष प्राप्त होने का प्राचीन भारतीय ग्रंथों में उल्लेख है । वेदों में अयोध्या को ईश्वर की नगरी बताया गया है और इसीलिए जनमानस के लिए   यह समूची नगरी आस्था का केंद्र रही है ।   युगों युगों से भारत का जनमानस राम राज्य को अपने जीवन और न्याय का आध

चीन की सामरिक घेराबंदी, Strategic siege of china

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जनसत्ता                         चीन की सामरिक घेराबंदी                                                                                                                ब्रह्मदीप अलूने साम्यवादी चीन का अपने देश की राष्ट्रीय सीमा का कोई स्पष्ट मानचित्र नहीं है । वह संयुक्तराष्ट्र में भरोसा नहीं रखता और इस देश की कम्युनिस्ट पार्टी उग्र राष्ट्रवाद की नीति से पोषित होकर प्राचीन चीनी सभ्यता,उसके राजवंश और इतिहास के आधार पर वृहत चीन साम्राज्य स्थापित करने की संकल्पना   के साथ संचालित है । पड़ोसी देशों की संप्रभुता और समुद्र की स्वायत्ता को चुनौती देने की चीन की यह विस्तारवादी नीति अंतर्राष्ट्रीय शांति को लगातार खतरे में डाल रही है । द्वितीय विश्व युद्द के बाद संयुक्तराष्ट्र की स्थापना उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद को खत्म करने तथा विश्व शांति की स्थापना के लिए की गई थी ।   संयुक्तराष्ट्र में पांच महाशक्तियों के साथ   सुरक्षा परिषद का गठन इसीलिए किया गया था जिससे विश्व में सामूहिक सुरक्षा की भावना को बढ़ावा मिले । इसके साथ ही ऐसे राष्ट्रों के खिलाफ निरोधात्मक और दंडात्मक कार्रवाई भी की जा

रॉ की मजबूती जरूरी,raw and mission

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राष्ट्रीय सहारा                               रॉ की मजबूती जरूरी                                                                        डॉ.ब्रह्मदीप अलूने http://rashtriyasahara.com/imageview_18866_142680622_4_71_30-07-2020_6_i_1_sf.html मनोवैज्ञानिक युद्दकला का कूटनीति से गहरा संबंध होता है,वैदेशिक संबंधों और खासकर प्रतिद्वंदी राष्ट्रों की नीतियों का पता लगाने,पहचानने और अपने राष्ट्रीय हितों की अभिवृद्धि के लिए उन्हें प्रभावित करने का काम ख़ुफ़िया तंत्र बखूबी करता है । अंतराष्ट्रीय राजनीति में जहां कूटनीति राष्ट्रीय शक्ति का प्रमुख तत्व है,वहीं खुफियां तंत्र को कूटनीति का मस्तिष्क माना जाता है । 1968 में स्थापित भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ के तेज तर्रार कार्यो से देश को सामरिक और राजनीतिक सफलताओं में बड़ी मदद मिली है,वर्तमान में पड़ोसियों की चुनौतियों के बीच रॉ के मजबूत होने की जरूरत महसूस की जा रही है। दरअसल राष्ट्रीय हितों की प्रगति के लिए शक्ति के विभिन्न तत्वों को अधिक प्रभावी बनाना कूटनीति से ही संभव हो सकता है और कूटनीति की सफलता के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है वह गोपनीय

जिंदगी है तो त्योहार है ,zindgi,eid,rakhi

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प्रदेश टुडे                             जिंदगी है तो त्योहार है                                                                                                       डॉ.ब्रह्मदीप अलूने  दुनिया में होना,रहना और जीना कितना जरूरी है इस पर सबका अपना अपना नजरिया हो सकता है,लेकिन राहत इन्दौरी ने जिंदा रहने को सबसे पहले और कुछ इस कदर जरूरी बताया की बाकी सारी गुंजाईशें ही खत्म हो गई,उन्होंने क्या खूब कहा है,ज़िन्दगी की हर कहानी बेअसर हो जाएगी,हम न होंगे तो यह दुनिया दर-ब-दर   हो जाएगी ।” यकीनन जिंदगी है तो ख्वाइशें है,उम्मीदें है,रास्ते है,मंजिलें भी है । जिंदगी है तो चाहते भी होगी और उन्हें पूरी शिद्दत से पूरा करने का जज्बा भी होगा । हिंदुस्तान की सरजमीं पर तो जिंदगी का मतलब जिम्मेदारी है जो ताउम्र चलती रहती है । यहां रिश्तों के साथ समाज और राष्ट्र भी ऐसे बंधे होते है कि खुद से ज्यादा सबकी परवाह करनी होती है । भला और किसी देश में बूढी दादी को कंधों पर उठाकर वोट दिलवाने के दृश्य कभी देखे है । श्रवण कुमार भी तो हिंदुस्तान में ही हुए है । जाहिर है यहाँ जिंदगी को खुद की जागीर नहीं समझी