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खनिज और वन्य संसाधनों से भरपूर राज्यों में बदहाल आदिवासी, tribal

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हम समवेत                खनिज और वन्य संसाधनों से भरपूर राज्यों में बदहाल आदिवासी                                                                                  डॉ.ब्रह्मदीप अलूने https://www.humsamvet.com/opinion-feature/adivasi-struggle-for-life-tools-in-india-3406 मेदिनीनगर की तटवर्ती नदी कोयल पर बंधे पुल की छांव में बैठकर आराम कर रहे मजदूरों के एक समूह पर लॉकडाउन के दौरान झारखंड पुलिस की नजर पड़ी और जब उनसे पूछा गया कि वे कौन है और कहाँ से आए है तो जवाब सुनकर पुलिस भी अवाक रह गई। दरअसल उन मजदूरों ने बताया कि वे हैदराबाद से करीब डेढ़ हजार किलोमीटर पैदल सफर तय करते हुए 1 महीने में अपने गृह प्रदेश झारखंड लौटे है। हैदराबाद की एक निर्माण कंपनी में काम करने वाले इन मजदूरों को लॉकडाउन कि घोषणा के बाद मालिक ने अपने हाल पर छोड़ दिया तो वे भूखे प्यासे पैदल ही अपने घर कि और निकल पड़े। ये सभी पलामू के रहने वाले है और यह स्थान खनिज संसाधनों से भरपूर माना जाता है। आदिवासी बाहुल्य यह इलाका खूबसूरत वन , घाटियों और पहाड़ियों के लिए विख्यात है जहां सैकड़ों प्रजाति के वन्य प्राणी रहते है और यह स

चाबहार पर चीनी दांव chhabhar china india

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राष्ट्रीय सहारा चाबहार पर चीनी दांव                 डॉ.ब्रह्मदीप अलूने अरब सागर के तट पर कराची बंदरगाह,ग्वादर बंदरगाह,कांडला बंदरगाह,मुंबई बंदरगाह और चाबहार भी है । भारतीय उपमहाद्वीप और अरब क्षेत्र के बीच हिन्द महासागर का हिस्सा है और भारत की कई नदियों का पानी फारस की खाड़ी में जाकर मिलता है । भारत के ईरान के साथ राजनीतिक,सांस्कृतिक,ऐतिहासिक और आर्थिक संबंधों के बाद  साल 2016 में  रणनीतिक क्षेत्र में अहम भागीदारी चाबहार के रूप में सामने आई थी जब ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार बंदरगाह पर भारत और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ था । इसे ईरान के दक्षिण समुद्र तट को भारत के पश्चिमी समुद्र तट से जोड़ने का रणनीतिक दांव माना गया था ।  इस परियोजना से पाकिस्तान और चीन को न केवल सामरिक और आर्थिक तौर पर बेहतर जवाब दिए जाने की सम्भावना बढ़ी थी बल्कि अफगानिस्तान में भारत की स्थिति भी मजबूत हुई थी। अब चाबहार बंदरगाह को लेकर 2016 में हुए भारत से समझौते को ईरान ने रद्द कर दिया है । उसने हाल ही में चीन पर भरोसा जताते हुए उससे चार सौ अरब डॉलर के रणनीतिक निवेश को लेकर समझौता   किया है जिसके अ

नेपाल में देव पर दानव भारी nepal china oli

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दबंग दुनिया                               नेपाल में देव पर दानव भारी                                                                            डॉ.ब्रह्मदीप अलूने                                                                     साम्यवादी धर्म को मानते ही नहीं है इसलिए वे हर धर्म की निंदा करते हैं,साम्यवादी नेता अपनी राजनीतिक सत्ता को मजबूत करने के लिए धर्म पर आधारित चिंतन, अवधारणाओं,संकल्पनाओं तथा सिद्धांतों को चुनौती देते है और मौका पड़ने पर वे हिंसा से जनता पर अपनी नास्तिक विचारधारा थोप देते है । दरअसल नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली   की   भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर विवाद उत्पन्न करने की उनकी कोशिश कम्युनिस्ट पार्टी की वह नीति ही है जिसके अनुसार धर्म के अस्तित्व को चुनौती देकर ही राजनीतिक सत्ता की इमारत को मजबूत किया जा सकता है । नेपाल में राजवंश की राजनैतिक सत्ता की समाप्ति के बाद लोकतंत्र का आगाज बेहद दिलचस्प लेकिन विवादास्पद रहा है । लोकतंत्र को सामाजिक न्याय की स्थापना का प्रमुख साधन माना जाता है,वहीं नेपाल के राजनीतिक संगठनों ने इसे येन-केन कर सर्वोच्

भारत की सामरिक नीति में परिवर्तन की जरूरत indian diplomacy

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   प्रजातंत्र                   भारत की सामरिक नीति में परिवर्तन की जरूरत                                                                   डॉ.ब्रह्मदीप अलूने                                                                   शक्ति संतुलन की व्यवस्था अस्थाई और अस्थिर होती है,वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन को शांति और स्थिरता बनाये रखने का एक साधन माना जाता है,इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है वैदेशिक नीति में आवश्यकता के अनुसार बदलाव करना और उसकी गतिशीलता को बनाये रखना। भारत के महान कूटनीतिज्ञ कौटिल्य ने कहा था कि शत्रुओं के प्रयत्नों की समीक्षा करते रहना चाहिए। यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि मध्यकाल में जिस महान अर्थशास्त्री ने अपनी कूटनीति की बदौलत तत्कालीन समय के सबसे सशक्त राजघराने को नष्ट कर दिया था ] उस महान कूटनीतिज्ञ को समझने का दावा करने वाले भारतीय वर्तमान में अपने सामरिक हितों की रक्षा करने के लिए संघर्षरत है और इसका प्रमुख कारण यथार्थवादी वैदेशिक नीति का अभाव रहा है। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का यथार्थवादी सिद्धांत यह कहता है कि किसी सम्प्रभु राष्ट्र के लिए शक्ति,शक्ति