धन की सत्ता,पॉलिटिक्स dhan ki stta poitics

 

पॉलिटिक्स






                             

                                                              

लोकतंत्र के बुनियादी सवाल लोक कल्याण से जुड़े है लेकिन भारत का लोकतंत्र नेता कल्याण के आसपास घूमता रहा है। लोकतंत्र में जनता का मन महत्वपूर्ण है लेकिन भारत में नेता का धन महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र समानता की बात करता है लेकिन भारत के धन कुबेर इस समानता को कूड़े दान में फेंकते नजर आते है।  लोकतंत्र का अर्थ सेवा से है लेकिन भारतीय लोकतंत्र में सारा मेवा नेताओं के पास है। दुनिया के सबसे ज्यादा गरीब भारत में रहते है लेकिन सबसे अमीर नेता आपको भारत में मिल जायेंगे।  समाजवादी भारत जनकल्याण की दुहाई देता रहा और इस बीच नेता कल्याण और उनका उत्थान आश्चर्यचकित करता रहा है।


इस दिवाली भारत के राजनेताओं और राजनीतिक दलों की अकूत सम्पत्ति पर पाठकों के लिए हमारी खास रिपोर्ट। दरअसल जनता महंगाई,भ्रष्टाचार,बेरोजगारी से बेहाल है,कई बैंक  कंगाल है वहीं हमारे लोकतंत्र के कथित पहरुएं  मालामाल है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स एक ख्यात और विश्वसनीय गैर सरकारी संगठन है  जो चुनावी और राजनीतिक सुधारों के क्षेत्र में लगातार काम कर रहा है। नेशनल इलेक्शन वॉच के साथ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स भारतीय राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने और चुनावों में धन और बाहुबल के प्रभाव को कम करने का प्रयास कर रहा है। इनकी ताजा रिपोर्ट राजनीतिक दलों की नमी और बेनामी सम्पत्ति को सामने लाई है। हमारे राजनीतिक दलों के पास कितनी सम्पत्ति है,उसका ब्यौरा इस संगठन के अनुसार इस प्रकार है...


बेनामी सम्पत्ति

एडीआर के अनुसार राष्ट्रीय दलों ने 2019-20 में अज्ञात स्रोतों से 3,370 करोड़ रुपये से अधिक का संग्रह किया है- 
वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान,भाजपा ने अज्ञात स्रोतों से 2,642.63 करोड़ रुपये की आय घोषित की,जो अज्ञात स्रोतों से राष्ट्रीय दलों की कुल आय का 78.24 प्रतिशत (3,377.41 करोड़ रुपये) है। वहीं कांग्रेस ने अज्ञात स्रोतों से 526 करोड़ रुपये की आय घोषित की,जो अज्ञात स्रोतों से राष्ट्रीय दलों की कुल आय का 15.57 प्रतिशत है।

 

नामी सम्पत्ति

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स द्वारा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के विश्लेषण के अनुसार देश के 48 राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों की संयुक्त संपत्ति 7,372 करोड़ रुपये से अधिक है। एडीआर रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 7 राष्ट्रीय और 41 क्षेत्रीय दलों द्वारा घोषित कुल संपत्ति क्रमशः 5349.25 करोड़ रुपये और 2023.71 करोड़ रुपये थी।

 

सम्पत्ति के मालिक

राष्ट्रीय दल

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी 2900 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के साथ शीर्ष पर है। यह कल सम्पत्ति का 54.29 फीसदी है राष्ट्रीय दलों में कांग्रेस ने 928.84 करोड़ रुपये सम्पत्ति घोषित की है यह कुल सम्पत्ति का 17.36 फीसदी है। जबकि बसपा 738 करोड़ की सम्पत्ति बताती है और यह कुल सम्पत्ति की 13.80 फीसदी है।

 

क्षेत्रीय दल

क्षेत्रीय दलों में, समाजवादी पार्टी द्वारा सबसे अधिक संपत्ति 572.21 करोड़ रुपये की सम्पत्ति,बीजद ने 232.27 करोड़ रुपये और अन्नाद्रमुक ने 206.75 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। सबसे कम पूंजी सीपीआई ने 24.87 करोड़ रुपये और राकांपा ने 31.05 करोड़ रुपये घोषित की थी।

चुनाव अधिकारों से संबंधित इस समूह की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 42 क्षेत्रीय दलों की कुल आय 877.957 करोड़ रुपये थी। रिपोर्ट के अनुसार, टीआरएस ने सबसे अधिक 130.46 करोड़ रुपये की कमाई की है,जो उन सभी दलों की कुल आय का 14.86 प्रतिशत है, जिनकी आय का विश्लेषण किया गया था। इस रिपोर्ट में विश्लेषण किए गए 42 क्षेत्रीय दलों की कुल आय में शिवसेना की आय 111.403 करोड़ रुपये और वाईएसआर-सी की 92.739 करोड़ रुपये थी, जो क्रमश: 12.69 फीसदी  और 10.56  फीसदी है।

 

राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल दलों की असल सम्पत्ति पर फिर भी संशय 

इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल आईसीएआई के दिशानिर्देशों का पालन करने में विफल रहे हैं,जो पार्टियों को वित्तीय संस्थानों, बैंकों या एजेंसियों के विवरण घोषित करने के लिए निर्देशित करते हैं और जिनसे ऋण लिया गया था।

 

 


मोदी काल में बीजेपी बन गई सबसे अमीर राजनीतिक पार्टी

सम्पत्ति के मामलें में कभी शीर्ष पर रहने वाली कांग्रेस पिछड़ गई और बीजेपी ने 2014-15 में पार्टी के सत्ता में आने के बाद निर्णायक बढ़त बना लीबीजेपी ने 2004-05 में तक़रीबन 123 करोड़ की संपत्ति ज़ाहिर की थी जो अब उससे कई सौ गुना अधिक है  2004-05 से 15-16 के बीच बीजेपी की संपत्ति में 627 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है

 

ये सिर्फ़ घोषित संपत्ति के आंकड़े हैंइससे किसी पार्टी की कुल संपत्ति का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता


आम आदमी के मुकाबले 1400 गुना रुपया आपके सांसद की जेब में है

इंडिया टुडे की डाटा इंटेलिजेंस यूनिट की एक खास रपट के मुताबिक 2019 में चुने गए सांसदों की औसत आय आम जनता की औसत आय से करीब 1400 गुना ज़्यादा हैमाने हर वो रुपया जो आपकी जेब में है,उसके लिए आपके सांसद की जेब में 1400 रुपए हैं 13 राज्य थे जहां सांसदों की संपत्ति राज्य की प्रति व्यक्ति आय से 100-1000 गुना के बीच थी15 राज्य ऐसे थे जहां नेताओं की आय राज्य की प्रति व्यक्ति आय से 1000 गुना से भी ज़्यादा थी

 


भारत के सबसे बड़े अमीर किसे और कितना चंदा देते है,पता नहीं

चंदा लेने से जुड़े नियमों के तहत राजनीतिक दलों को 20,000 रुपये से ज़्यादा चंदा देने वाले दानकर्ताओं के नाम सार्वजनिक करना होता है सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट नाम की एक कंपनी ने बीजेपी को अकेले 251.22 करोड़ रुपये चंदे के तौर पर दिए ये बीजेपी को मिलने वाले कुल चंदे का 47.19 फीसदी है. इसी कंपनी ने 13.90 करोड़ रुपये कांग्रेस को भी दिए हैं सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट का नाम शायद पहले नहीं सुना होगा ये एक कंपनी है जो कॉरपोरेट दुनिया से पैसा लेकर राजनीतिक दलों को चंदा देती है

फोर्ब्स ने साल 2021 के लिए भारत के 10 सबसे अमीर अरबपतियों की सूची जारी की है लिस्ट में मुकेश अंबानी पहले नंबर पर बने हुए हैं उनकी नेटवर्थ 84.5 अरब डॉलर की है गौतम अडाणी सूची में दूसरे स्थान पर हैं. अडाणी की नेट वर्थ 50.5 अरब डॉलर है सूची में तीसरे स्थान पर शिव नाडर हैं,जिनकी नेटवर्थ 23.5 अरब डॉलर है  

प्रत्येक राजनीतिक दल में धनबल को प्राथमिकता

 

नई लोकसभा में कुल 475 सांसद करोड़पति हैं। 17वीं लोकसभा के 542 सांसदों में से 475 सदस्य करोड़पति हैं। इस सूची में मध्य प्रदेश के नकुलनाथ 660 करोड़ रुपए की संपत्ति के साथ टॉप पर हैं। इसके बाद तमिलनाडु के कन्याकुमारी से सांसद वसंतकुमार एच (417 करोड़ रुपये) का दूसरा नंबर है। तीसरे स्थान पर कर्नाटक के बेंगलुरू ग्रामीण से चुनाव जीते डी के सुरेश (338 करोड़ रुपये) का आते हैं।


भाजपा के 88 फीसदी सांसद और कांग्रेस के 96 फीसदी सांसद करोडपति

इस बार को लोकसभा में 266 सदस्य ऐसे हैं जिनकी संपत्ति पांच करोड़ या उससे अधिक है। बीजेपी के 303 सांसदों में से 265 (88  फीसदी ) करोड़पति हैं। वहीं शिवसेना के सभी 18 सांसदों ने अपनी संपत्ति एक करोड़ रुपए से अधिक बताई है। कांग्रेस के जिन 51 सांसदों के हलफनामों दायर किए है। उनमें से 43 (96 फीसदी) सांसद करोड़पति हैं। इसी तरह डीएमके के 23 में से 22 सांसद (96 फीसदी),तृणमूल कांग्रेस के 22 में से 20 सांसद (91 फीसदी) और वाईएसआर कांग्रेस के 22 में से 19 सांसदों (86 फीसदी) की संपत्ति एक करोड़ से अधिक है।




गरीबी में भारत अफ्रीका से  भी बदतर

यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम के ग्लोबल मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स 2021 के हिसाब से भारत में गरीबी का स्तर अफ्रीका के गरीबों के जैसा ही है और कई मामलों में अफ़्रीकी के बेहद गरीब देश के ओग भारत के गरीबों के मुकाबलें बेहतर स्थिति में हैलेकिन भारत के अमीर इस स्थिति को बदल सकते हैऑक्सफैम की रिपोर्ट इन इक्वलिटी वायरस नाम की रिपोर्ट में कहा गया कि मार्च 2020 के बाद की अवधि में भारत के 100 अरबपतियों की संपत्ति में 12,97,822 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई हैअगर देश के ये रईस इतनी राशि 13.8 करोड़ सबसे गरीब लोगों में बांट दें तो हर व्यक्ति को 94,045 रुपये दिए जा सकते हैं

बहरहाल कानूनी तरीके से संपत्ति अर्जित करने पर भारत में कोई रोक नहीं है लेकिन साल दर साल संपत्ति बढ़ाने का नेताओं के पास जो फॉर्मूला है वो आज तक जनता में किसी को हासिल नहीं हो पाया है। यही कारण है कि नेता मालामाल होते जा रहे है और जनता कंगाल होती जा रही है

 

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brahmadeep alune

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