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जब भारतीय सैनिकों ने चीन की सीमा में घुसकर उनके 300 सैनिकों को मार डाला indira gandhi china

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  सांध्य प्रकाश इंदिरा गांधी का चीन को रणनीतिक जवाब                     जब भारतीय सैनिकों ने चीन की सीमा में घुसकर उनके 300 सैनिकों को मार डाला                                                                                                                    भारत और चीन के बीच की सीमा विवाद की गुत्थी सुलझती ही नहीं। आज़ादी के बाद जवाहरलाल नेहरु से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन से निपटने की नीति संतुलन पर आधारित रही है लेकिन उस पर नियन्त्रण भारत का कभी नजर नहीं आया। हालांकि इंदिरा गांधी के शासनकाल में ऐसा बिल्कुल नहीं था। 1962    में चीन से करारी पराजय,पाकिस्तान और चीन की मजबूत जुगलबंदी और अमेरिका दबाव के बाद भी इंदिरा गांधी ने चीन को कई रणनीतिक मोर्चों पर करारी शिकस्त दी थी।   1962 में चीन से पराजय का कडवा घूंट भारतीय सेना को बहुत परेशान करता रहा था। 1965 में पाकिस्तान पर निर्णायक विजय के बाद सेना की नजर चीनियों पर थी और यह मौका उन्हें जल्द मिल गया। चीन   में स्थित भारतीय दूतावास को चीन ने घेर कर भारत को नीचा दिखाने की कोशिश की तो तत्कालीन प्रधान

क्रिकेट पर मजहबी तमाशा,दबंग दुनिया cricket pak india

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दबंग दुनिया                                                                                                        क्रिकेट के विश्वकप में पाकिस्तान की भारत पर विजय के बाद पाकिस्तान के गृहमंत्री शेख़ रशीद ने इसे इस्लाम की विजय के तौर पर निरुपित किया है। इसके पहले 2007 में टी- 20 विश्व कप फ़ाइनल में भारत से हारने के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन कप्तान शोएब मलिक ने मुस्लिम दुनिया से माफ़ी मांगी थी। दरअसल पाकिस्तान असहिष्णुता,अनिश्चितताओं और असुरक्षा से ग्रस्त देश है जो धर्म को हथियार की तरह उपयोग करता है,जिससे उन्माद पैदा किया जा सके। यह देखने में आया है कि मोहाजिर अपनी पहचान के संकट से अक्सर जूझते है और उन्हें अपनी निष्ठा साबित करने के लिए बार बार कोशिशें कारण पड़ती है। इस्लामिक दुनिया में पाकिस्तान की स्थिति कुछ ऐसी ही है जो किसी भी कीमत पर अपनी धार्मिक पहचान को आगे रखकर विशुद्ध इस्लामिक होने का प्रमाण पेश करता रहा है। यह विडम्बना ही है कि अरब देशों में भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमान इस्लामिक शुद्धता के आधार पर अक्सर गैर बराबरी से जूझते है। इन देशों में अरब शेखों का अमानवीय व्यवह

सुनियोजित साजिश,राष्ट्रीय सहारा bangladesh hindu sahara

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  राष्ट्रीय सहारा भारत और पाकिस्तान के बंटवारे की कहानी नोआखाली के ज़िक्र के बिना अधूरी मानी जाती है ।   तकरीबन पचहत्तर साल पहले 1946 में लक्ष्मी पूजन के दिन यहां भीषण साम्प्रदायिक दंगे शुरू हुए थे ।   उस समय जिन्ना के डायरेक्ट एक्शन डे से सबसे ज्यादा प्रभावित इस क्षेत्र में हजारों हिन्दुओं का कत्लेआम कर दिया गया था । सात दशक से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद दुनिया में बहुत कुछ बदला है लेकिन मौजूदा बांग्लादेश के चटगांव डिवीज़न के नोआखाली ज़िले में स्थितियां जस की तस नजर आती है । इस साल दुर्गा पूजा पर नोआखाली में एक बार फिर हिन्दुओं को बड़े पैमाने निशाना बनाया गया । 1946 में नोआखाली मुस्लिम बहुल था,लेकिन ज़मींदारों में हिंदुओं की संख्या अधिक थी । उस समय यह माना गया था कि नोआखाली में एक सुनियोजित दंगा था , जिसका लक्ष्य   हिंदुओं को भगाकर उनकी संपत्तियों पर क़ब्ज़ा करना था । इस समय भी हालात मिले जुले और समान नजर आते है । दुर्गा पूजा पर हिन्दुओं और उनके धर्म स्थलों पर हमलें इतने सुनियोजित   थे कि पुलिस प्रशासन और सरकार के नुमाइन्दें प्रभावित हिन्दुओं को राहत देने में नाकामयाब रहे

हिन्दुओं पर हमले और चुनौतियां,bnagladesh hindu janstta

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     जनसत्ता                                   परिवर्तन और परम्परा का निर्णायक संघर्ष अब राष्ट्रीय राजनीति की प्रमुख चुनौती बन गया है । इससे सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में दक्षिण एशिया का बहुजातीय और बहुसांस्कृतिक समाज है जो सदियों से एक दूसरे के साथ समन्वय स्थापित कर आगे बढ़ता रहा है लेकिन कट्टरपंथी ताकतों के प्रभाव से अब इस पर भी संकट गहराने लगा है । दरअसल भारत की भौगोलिक परिस्थितियों की प्रतिकूलताओं ने देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए नित नई चुनौतियां प्रस्तुत की है। किसी देश के शक्ति और सामर्थ्य में वहां के नागरिकों,संस्कृति और भूगोल का गहरा योगदान होता है। भारत ने जहां बहुसंस्कृतिवाद को अपनाया और उसे पोषित किया है वहीं पड़ोसी देशों के धार्मिक और संस्कृतिवाद ने इस समूचे क्षेत्र की समस्याओं को बढ़ाया है। भारत के पड़ोसी देश बंगलादेश के सबसे बड़े धार्मिक अल्पसंख्यक हिन्दु है और उनकी आबादी करीब पौने दो करोड़ है । यह देश की कुल आबादी की 9 फीसदी के आसपास है । बंगलादेश में नव दुर्गा का त्यौहार जोर शोर से मनाया जाता है । पिछले कुछ सालों में शेख हसीना की सरकार ने देश में धार्मिक