बुधवार, 21 जुलाई 2021

इथोपिया में दांव पर नोबल शांति,ithopiya nobal shanti prize sahara

 राष्ट्रीय  सहारा


                         

अफ्रीका के बड़े और अग्रणी देशों में शुमार इथोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली को अपने देश में शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग स्थापित करने के उनके सकारात्मक प्रभाव वाले प्रयासों के लिए 2019 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया था  इसका खास कारण यह था कि  उन्होंने पड़ोसी देश इरिट्रिया के साथ दो दशक से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने में निर्णायक पहल  की थीनोबेल समिति ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा था कि उनकी राजनीतिक पहल और सुधारों ने कई नागरिकों के बीच बेहतर जीवन और बेहतर भविष्य के लिए उम्मीद जगा दीयहीं नहीं समिति ने यह उम्मीद भी जताई थी कि यह पुरस्कार प्रधानमंत्री अबिय अहमद के शांति और मेल-मिलाप के प्रयासों को मजबूती प्रदान करेगा


लेकिन अब इथोपिया के नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित प्रधानमंत्री अबिय अहमद की राजनीतिक सत्ता का व्यवहार शांति की उम्मीदों को ध्वस्त करता हुआ दिखाई दे रहा है अहमद के राजनीतिक क्रियाकलाप और अपने ही देश के लोगों पर हिंसा की कोशिशों से  इथोपिया में अस्थिरता बढ़ी है और इससे प्रभावित लाखों लोग  मानवीय त्रासदी से बूरी तरह से जूझने को मजबूर हो गए हैअहमद विपक्षी नेताओं के खिलाफ दमनकारी रणनीति अपनाएं हुए हैसंयुक्त राष्ट्र और अन्य सहायता समूहों के अनुसार इथोपिया के टिग्रे प्रांत में बच्चे कुपोषण से मर रहे हैंसैनिक खाद्य सहायता लूट रहे हैं और सहायता कर्मियों को सबसे कठिन क्षेत्रों में पहुंचने से रोका गया हैइथोपिया की सरकारी सेना जमीनी और हवाई हमलों से टिग्रे प्रांत के लोगों को बड़ी संख्या में निशाना बना रही है और इन इलाकों में जाने से चिकित्सा कर्मियों को भी रोका जा रहा है जिससे प्रभावितों का इलाज न हो सके। इन सबके पीछे टिग्रे प्रांत में अबिय का राजनीतिक प्रभाव स्थापित करने की आक्रामक कोशिश है जिससे इस प्रांत की प्रभावशील और लोकप्रिय पार्टी पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट को दबाया जा सके


यह बेहद अविश्वनीय है कि कुछ समय पहले तक शांति के लिए प्रतिबद्द प्रधानमंत्री अबिय अहमद अमानवीयता की सीमाएं लाँघ रहे है और अपनी सरकारी सेनाओं का बड़े पैमाने पर दुरूपयोग कर रहे है गौरतलब है कि इरिट्रिया की राजधानी अस्मारा में नौ जुलाई 2018 को ऐतिहासिक बैठक के बाद अबी और इरिट्रियाई राष्ट्रपति इसैआस अफवेरकी ने दोनों देशों के बीच 20 सालों के गतिरोध को औपचारिक रूप से समाप्त किया था और इसे अफ्रीका महाद्वीप में शांति स्थापना की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना गया था अबिय ने जेल से बागियों को रिहा किया,सरकार की नृशंसता के लिए माफी मांगी और निर्वासन में रह रहे सशस्त्र संगठनों का स्वागत कियाइसके अलावा उन्होंने केन्या और सोमालिया के बीच एक समुद्री क्षेत्र विवाद में मध्यस्थता करने में मदद की। तथा सूडान और दक्षिण सूडान के नेताओं को बातचीत के लिए एक साथ लाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाईअबिय अफ्रीका के सबसे युवा और लोकप्रिय नेताओं में शुमार है। इथोपिया को प्राचीन ईसाई राज्य कहा जाता है,चौथी शताब्दी में आधिकारिक तौर पर ईसाई धर्म अपनाने वाला इस क्षेत्र का पहला देश था 2018 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद अबिय अहमद ने प्रधानमंत्री का पद संभाला और उन्होंने इथोपिया में परिवर्तनकारी बदलाव की बड़ी उम्मीदें जगाईं


अबिय अहमद एक मुस्लिम पिता और एक ईसाई मां के बेटे है और  उन्होंने देश में जातीय विभाजन को ठीक करने का वादा किया था। इथोपिया में 100 से ज्यादा जातीय समूह रहते है और इनका इतिहास बेहद रक्तरंजित रहा है। अबिय ने खुद की प्रशंसा को तो पसंद किया लेकिन उनके कुछ कार्यों को लेकर जैसे ही उनके देश में आलोचना होने लगी तो उनका व्यवहार आक्रामक हो गया। अबिय अहमद ने आलोचकों को दबाने के लिए पत्रकारों को गिरफ्तार करने,हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने तथा इंटरनेट बंद करने जैसे कदम उठायें इसके साथ ही सुरक्षा बलों पर यह भी आरोप है कि  उन्होंने विद्रोह दबाने के लिए सैकड़ों लोगों की हत्या  कर दी इस समय इथोपिया के टिग्रे क्षेत्र में हिंसा के चलते लोगों को भुखमरी और अकाल का सामना करना पड़ रहा है टिग्रे में सरकारी सेना के द्वारा हजारों लोगों को उनके घरों से खदेड़ दिया गया है,जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक जातीय सफाई अभियान कहा हैऐसे में वैश्विक समुदाय को यह डर सताने लगा है कि  अफ्रीका में राजनीतिक अस्थिरता का कारण इथोपिया का संकट न बन जाएं

संयुक्तराष्ट्र के अनुसार टिग्रे में हजारों बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं तथा करीब 18 लाख लोग अकाल की कगार पर खड़े हैं,जो पिछले कुछ महीनों से चल रहे संघर्ष का परिणाम हैटिग्रे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट और सरकारी सेनाओं के बीच जारी लड़ाई की वजह से अभी तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है20 लाख के करीब लोगों को विस्थापित होना पड़ा हैयुद्ध लड़ रहे दोनों पक्षों पर बड़े पैमाने पर हत्या और मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगा है यह क्षेत्र दशकों में सबसे खराब अकाल की स्थिति का अनुभव कर रहा है करीब 52 लाख लोगों को अभी भी मानवीय सहायता की जरूरत है,इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं संयुक्तराष्ट्र इन इलाकों में मानवीय मदद देना चाहता है लेकिन इसे भी इथोपिया की सरकार रोक रही है


हाल ही में इथोपिया में प्रधानमंत्री अबिय अहमद की प्रॉस्‍पेरिटी पार्टी संसदीय चुनाव जीत गई है वहीं विपक्षी दलों ने चुनावों में व्यापक धांधली,परेशान करने और धमकी दिये जाने का आरोप लगाया हैइससे देश के दूसरे इलाकों में भी अस्थिरता बढने का खतरा मंडरा रहा है इथोपिया को जातीय आधार पर 10 क्षेत्रीय राज्यों में विभाजित किया गया है इन राज्यों को स्वायत्त राज्य के रूप में बताया गया है,लेकिन यहां पर केंद्रीय संस्थानों की मौजूदगी भी है। टिग्रे के नेताओं  का कहना है कि अबी अहमद संघीय ताकतों को राज्य में बढ़ा रहे है तथा विरोधियों को निशाना बना रहे है। इथोपिया का टिग्रे प्रांत राजनीतिक रूप से बेहद मजबूत माना  जाता है और यहां के राजनीतिक दलों ने देश की सत्ता को भी लंबे समय तक संभाली है। अबिय के निशाने पर टिग्रे के राजनीतिक नेता और राजनीतिक दल है।


इथोपिया ने राजशाही,साम्यवादी की तानाशाही के साथ विद्रोह,भयंकर अकाल और शरणार्थियों की बड़ी संख्या जैसी समस्याओं का लंबे समय तक सामना किया  है लेकिन बीते कुछ दशकों में यहां राजनीतिक स्थिरता कायम करने में सफलता मिली थी इथोपिया को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यस्थाओं में से एक माना जाता है तथा यह  कॉफी और अफ्रीका में शहद का अग्रणी उत्पादक देश है इथोपिया में राजनीतिक स्थिरता कायम रहने से इसका आर्थिक और राजनीतिक लाभ अफ्रीका के कई गरीब देशों को मिल सकता है इसके लिए जरूरी है कि प्रधानमंत्री अबिय अहमद राजनीतिक उदारता का परिचय देते हुए टिग्रे के नेताओं से बातचीत करके युद्द को रोके तथा  युद्दग्रस्त क्षेत्र में मानवीय सहायता को बाधित न होने दें अबिय अहमद को यह समझना  होगा की भुखमरी से जूझते लाखों लोगों के लिए मानवीय सहायता मरहम का काम करेगी और इससे निश्चित ही इस पूरे क्षेत्र में शांति स्थापित करने में मदद मिल सकती है 

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brahmadeep alune

बिक गया पाकिस्तान.... ! bik gaya pakistan politics

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