बिक गया पाकिस्तान.... ! bik gaya pakistan politics

 पॉलिटिक्स

                         

                   

                                                           

 

पाकिस्तान की जमीन,संस्कृति,पर्यटन,कृषि,संप्रभुता,संसाधन,बंदरगाह, अर्थव्यवस्था,स्टॉक एक्सचेंज,समुद्र और आसमान पर अब चीन का कब्जा बढ़ता जा है। पाकिस्तान चीनी मॉडल पर आधारित ऐसा देश बनने की ओर तेजी से अग्रसर  है जिसकी हर जरूरत चीन से पूरी होगी और देश पर चीन का पूरा नियंत्रण भी होगा। इस्लामाबाद में 50 हजार से ज्यादा चीनी रह रहे है,पाकिस्तान के स्कूलों में मंदारिन को अनिवार्य कर दिया गया है। बैंकों में युआन के लेन देन को आसान बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग,मेट्रो और अन्य यातायात के प्रबंधन की जिम्मेदारियां चीनी कम्पनियां उठा रही है। विकास के मास्टर प्लान के अंतर्गत पाकिस्तान की हजारों एकड़ जमीन चीन को सौंप दी गई है जिस पर वह फसल उगाएगा। चीन सीपीईसी परियोजना के जरिए निर्माण के साथ पाक के ऊर्जा संकट को दूर करने का दावा भी कर रहा है,इसके लिए चीन पूरे पाक में करीब 17 परियोजनाएं संचालित कर रहा है। आने वाले समय में पाकिस्तान के लोग अपनी बिजली जरूरतों के लिए चीन पर पूरी तरह निर्भर हो जाएंगे। दुनिया भर में सस्ता और नकली मॉल भेजने वाले चीन पाक के कई इलाकों में गोदामों का एक राष्ट्रीय भण्डारण नेटवर्क भी स्थापित कर रहा है,यहीं नहीं चीन की निगाहें पाकिस्तान के खनिज संसाधनों पर भी है


इमरान खान का नया पाकिस्तान धोखा

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो ने दावा किया है कि इस साल 2021 में ही इमरान खान ने 10 अरब डॉलर का लोन लिया है जिससे पाकिस्तान का कुल कर्ज 35 फीसदी बढ़ गया है। इस प्रकार इमरान खान के कार्यकाल में पाकिस्‍तान का बाहरी कर्ज 95 अरब डॉलर से बढ़कर 116 अरब डॉलर हो गया है।

इमरान खान नए पाकिस्तान कि बात कहकर करोड़ों लोगों को गुमराह कर रहे है जबकि हकीकत बेहद अलग है। अभी पाकिस्तान कि विकास दर पांच  फीसदी से भी कम है लेकिन 2022 तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का ख्याली महल,दस फीसदी बेरोजगारी दर,लाखों लोगों को रोजगार नहीं लेकिन सैन्य बलों की तनख्वाह में 10 फीसदी बढ़ोत्तरी,देश के 42 प्रतिशत लोग खेती से जुड़े लेकिन इसमें लगातार गिरावट जबकि सैन्य खर्च में 15 फीसदी बढोत्तरी,देशी और सरकारी कल कारखाने बर्बाद होकर बंद होने की कगार पर,कर देने वाले महज 1 प्रतिशत और सरकारी खर्च का कोई हिसाब नहीं,यहीं हकीकत है 21 करोड़ आबादी वाले पाकिस्तान की


चीन गुलाम बनाकर अब ऋण माफ नहीं करेगा

पाकिस्‍तान पर 30 दिसंबर 2020 तक कुल 294 अरब डॉलर का कर्ज था जो उसकी कुल जीडीपी का 109 प्रतिशत है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि कर्ज और जीडीपी का यह अनुपात वर्ष 2023 के अंत तक 220 फीसदी तक हो सकता है। इस साल इमरान खान सरकार के पांच साल पूरे हो जाएंगे। इमरान खान ने सत्‍ता संभालने से पहले चुनाव प्रचार में वादा किया था कि वह एक नया पाकिस्‍तान बनाएंगे जो दुनिया से कर्ज के लिए भीख नहीं मांगेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्‍तान में बनाए ऊर्जा प्‍लांट पर चीन ने करीब 19 अरब डॉलर का निवेश किया है। चीन ने पाकिस्‍तान के ऊर्जा खरीद पर हुए समझौते को पुनर्गठित करने के अनुरोध को खारिज कर दिया और कहा कि कर्ज में किसी भी राहत के लिए चीनी बैंकों को अपने नियम और शर्तों में बदलाव करना होगा। चीनी बैंक पाकिस्‍तान सरकार के साथ पहले हुए समझौते के किसी भी शर्त को बदलने के लिए तैयार नहीं हैं।


वन बेल्ट वन रोड से पाकिस्तान रोड पर आया

यह तीन ख़रब अमरीकी डॉलर से ज़्यादा की लागत वाली परियोजना है। इसके तहत आधारभूत ढांचा विकसित किया जाना है। इसके ज़रिए चीन सेंट्रल एशिया, दक्षिणी-पूर्वी एशिया और मध्य-पूर्व में अपना दबदबा बढ़ाना चाहता है। पाकिस्तान इसका महत्वपूर्ण अंग है और चीन ने विकास के सपने दिखाकर पाकिस्तान को बूरी तरह उलझा दिया है। इस परियोजना में  चीन के सरकारी बैंकों का पैसा लगा है और इसकी शर्ते बेहद सख्त है। पाकिस्तान ने कभी यह अनुमान नहीं लगाया कि कर्ज़ से उनकी प्रगति किस हद तक होगी लेकिन यह साफ है कि कर्ज़ नहीं चुकाने की स्थिति में ही कर्ज़ लेने वाले पाकिस्तान को पूरा प्रोजेक्ट चीन के हवाले करना होगा। पाकिस्तान के बारे में कहा जा रहा है कि दबाव के बावजूद इस प्रोजेक्ट के अनुबंधों को सार्वजनिक नहीं किया गया है।


 

 पाकिस्तान बना आर्थिक उपनिवेश

पाकिस्तान में ग्वादर और चीन के समझौते को लेकर कहा जा रहा है कि पाकिस्तान चीन का आर्थिक उपनिवेश बन रहा है। ग्वादर में पैसे के निवेश की साझेदारी और उस पर नियंत्रण को लेकर 40 सालों का समझौता है। चीन का इसके राजस्व पर 91 फ़ीसदी अधिकार होगा और ग्वादर अथॉरिटी पोर्ट को महज 9 फ़ीसदी मिलेगा। इससे साफ है कि  पाकिस्तान का अगले चार दशकों तक  ग्वादर पर नियंत्रण नहीं रहेगा।  चीन ने पाकिस्तान को उच्च ब्याज़ दर पर कर्ज़ दिया है। पाकिस्तान कि खस्ताहाल आर्थिक स्थिति से यह बल मिला है कि पाकिस्तान पर आने वाले वक़्त में चीनी कर्ज़ का बोझ और बढ़ेगा।


 

वैश्विक संस्थाओं ने भी चिंता जताई

इस साल पाकिस्तान को आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की तरफ से 130 अरब रुपये का लोन मिला है। जिसमें आईएमएफ ने पाकिस्तान को 500 मिलियन डॉलर यानि 36 अरब 22 करोड़ 37 लाख रुपये का लोन दिया है। यानि,पाकिस्तान पूरी तरह से कर्ज के बोझ में धंसा हुआ है और रिपोर्ट के मुताबिक हर पाकिस्तानी नागरिक के सिर पर 2 लाख रुपये का कर्ज हो चुका है। ऐसे में आईएमएफ ने कहा है कि पाकिस्तान की जो स्थिति है, वो बेहद खराब है।


आतंकवाद के कारण पाकिस्तान को दस  बिलियन डॉलर का नुक़सान

पाकिस्तान विदेशी मदद पर अपनी आर्थिक स्थिति के लिए बहुत हद तक निर्भर है।  फ़ाइनैंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स की ग्रे लिस्ट में बने रहना देश की अर्थव्यवस्था को तोड़ने वाला हैइससे पाकिस्तान को हर साल करीब 10 बिलियन डॉलर का नुक़सान हो रहा है इमरान खान को डर सता रहा है की एफएटीएफ़ पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट करता है तो पहले से ही लचर चल रही अर्थव्यवस्था पर ख़तरा और बढ़ जाएगा,क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक मदद नहीं मिल पाएगी। अंतर्राष्ट्रीय दबावों और प्रतिबंधों का असर दिख रहा है,देश में महंगाई बढ़ रही है तथा आम जनता के लिए रोजी रोटी जुटाना मुश्किल होता जा रहा है  

जाहिर है कर्ज में डूबा पाकिस्तान भविष्य में इससे कभी उबर पाएगा,इसकी संभावना बहुत कम है और ऐसे में पाकिस्तान में अस्थिरता ही बढ़ेगी। मुमकिन है जल्द ही पाकिस्तान में फिर से सैन्य शासन लागू हो,जिससे लोगों कि आवाज दबाई जा सके। चीन का प्रभाव इन आशंकाओं को बढ़ा रहा है।

 

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