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जुलाई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आंतरिक सुरक्षा का संकट,Asam mijoram vivad rashtriya sahara

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  राष्ट्रीय सहारा                           विविधताओं वाले भारत की संविधानिक प्रतिबद्धताताओं को क्षेत्रीयतावाद की चुनौती का अक्सर सामना करना पड़ता है। पूर्वोत्तर में जितनी भौगोलिक असमानताएं है उससे कही ज्यादा सांस्कृतिक विभिन्नताएं है। बराक घाटी और ब्रह्मपुत्र घाटी में बंटे इसके प्राकृतिक क्षेत्र कबीलों और जातियों के प्रभुत्व की रक्तरंजित लड़ाई से अभिशिप्त रहे है और देश की सुरक्षा के लिए यह बड़ा चुनौतीपूर्ण रहा है। इन समस्याओं को क्षेत्रीय राजनीतिक दल भी बढ़ाते रहे है। दरअसल असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद में पुलिसकर्मियों का मारा जाना तो दुखदायी है ही उससे भी बड़ी हिमाकत यह है कि उन पुलिसकर्मियों को शहीद कहकर असम की सरकार ने क्षेत्रीय राजनीति का ऐसा दांव खेला है जिसके दूरगामी परिणाम अलगाव और आतंक की ओर जाते है।   हम सब जानते है कि पूर्वोत्तर में लोकतंत्र पर अलगाववाद हावी रहा है और आज़ादी के आठवे दशक में प्रवेश करने के बाद भी समस्या जस की तस नजर आती है। यह भी बेहद दिलचस्प है कि गृहमंत्री इस घटना के   कुछ समय पहले असम की यात्रा पर थे और उन्होंने पूर्वोत्तर में शांति स्थापित हो जान

लोकतंत्र बर्खास्त... ! loktantra barkhast politics Tunisia Africa

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  पॉलिटिक्स         उत्तरी अफ़्रीकी देश टयूनेशिया के लोग सडकों पर प्रधानमंत्री हिचम मेकिची सरकार के बर्खास्त होने का जश्न मना रहे है ।   उनके इस जश्न में देश के राष्ट्रपति कैस सैयद भी शामिल हो गए है ।   राष्ट्रपति का कहना है कि उन्होंने देश में शांति लाने के इरादे से ऐसा किया है ।     करीब सवा करोड़ की आबादी वाला   ट्यूनीशिया उदार इस्लामिक राष्ट्र है जिसे अफ्रीका का यूरोप कहा जाता है ।   यह भूमध्यसागर के किनारे स्थित खूबसूरत देश जिसके पूर्व में लीबिया और पश्चिम मे अल्जीरिया हैं। देश की पैंतालीस प्रतिशत ज़मीन सहारा रेगिस्तान में है जबकि बाक़ी तटीय जमीन खेती के लिए इस्तमाल होती है ।     इस्लामिक   देश होने के बावजूद इस देश का समाज खुलेपन और विकास को पसंद करता है और इसी कारण ट्यूनीशिया अफ्रीका में यूरोप की तरह   दिखाई देता है ।   करीब एक दशक पहले 2011 में अरबी राजशाहों व तानाशाहों से त्रस्त इस देश की जनता ने सड़कों पर शुरू हुए प्रदर्शन कर सत्ता को चुनौती दी थी ।     इसके बाद यह सत्ता विरोधी आंदोलन सूडान,अल्जीरिया,सीरिया और अन्य अरब के देशों में भी फ़ैल गए,इसे   अरब स्प्रिंग कहा जाता ह

जिनपिंग का तिब्बत पर नया दांव,zinping tibbt china

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  जनसत्ता                                                                                          अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में हस्तक्षेप को एक तानाशाही दखलंदाजी माना जाता है जो एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के मामलों को पलटने के लिए करता है। चीन की वैदेशिक नीतियों में हस्तक्षेप करके किसी राज्य की संप्रभुता को शत्रुतापूर्ण तरीके से चोट पहुँचाने की नीति शुमार रही है और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग   इसे लगातार बढ़ावा दे रहे है । हाल ही में शी जिनपिंग   ने अचानक तिब्बत की यात्रा कर उसी आक्रामकता का प्रदर्शन किया है । चीनी कम्युनिस्ट पार्टी इस साल अपनी स्थापना के सौ वर्ष मना रही है,इस मौके पर शी जिनपिंग   ने तिब्बत की ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं पर प्रहार करते हुए तिब्बत को कम्युनिस्ट पार्टी का अनुसरण करने और समाजवाद के रास्ते पर   चलने की नसीहत दे डाली । जिनपिंग   की तिब्बत यात्रा से सामरिक,आर्थिक,सांस्कृतिक और धार्मिक संदेश   स्पष्ट दिखाई दे रहे है । वे ल्हासा में एक बड़े महत्वपूर्ण बौद्ध मठ-द्रेपुंग मठ भी गए और उन्होंने प्राचीन और धार्मिक तिब्बत के इलाक़े के धार्मिक और सांस्कृतिक

बहनजी,बसपा और ब्राह्मण,mayavati brahman smmelan

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  प्रात:किरण                                                                                                                            बहन जी के नाम से पहचानी जाने वाली मायावती के बहुजन समाज का यह परिवर्तित रूप है जिसे सर्व समतावादी समाज के नए कलेवर में दिखाने की कोशिश की गई है। बसपा की स्थापना के उद्देश्यों में पिछड़ों तथा अल्पसंख्यक वर्ग का विकास बताया जाता है लेकिन नई परिकल्पना में ब्राह्मण अचानक महत्वपूर्ण बना दिये गए है तथा अयोध्या की जमीन को इसके प्रचार के लिए सबसे मुफीद माना गया है। अगले साल देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में चुनाव होने है इसलिए राजनीतिक दलों का आकर्षण विभिन्न समाजों की ओर बढ़ना   लाजिमी है। हाल ही में अयोध्या में बहुजन समाज पार्टी के द्वारा कथित रूप से   प्रबुद्ध वर्ग विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया जो असल में ब्राह्मण सम्मेलन था। इस सम्मेलन में वह सब कुछ था जिसे भारतीय राजनीतिक दल सत्ता पाने के लिए आजमाते रहते है। सम्मेलन में जय भीम , जय हिन्द , जय परशुराम और जय श्री राम के नारे भरपूर लगाएँ गए। भगवान बुद्ध के   अष्‍टांगिक मार्ग   सम्यक दृष्टि,सम्यक