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मार्च, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दांव पर तमिलों का भविष्य

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  राष्ट्रीय सहारा                              यह ऐतिहासिक मान्यता रही है कि दक्षिण भारत के तमिलों ने सिंहलियों को पराजित किया था,इसीलिए सिंहली तमिलों को लेकर आशंका ग्रस्त रहे है और उनकी यह नीति भारत के संदर्भ में सदैव नजर आती है ।   श्रीलंका में करीब 20 लाख तमिल बसते है,जो कई वर्षों से सामाजिक,धार्मिक और आर्थिक   उत्पीड़न सहने को मजबूर है । तमिल बराबरी पाने के संविधानिक अधिकारों के लिए लगातार संघर्षरत है लेकिन भारत की कोई भी पहल श्रीलंका में अब तक वह 13 वां संविधान संशोधन अधिनियम लागू करवाने में सफल नहीं हो सकी है   जिससे तमिलों के गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए कई तरह के अधिकार मिलने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है । भारत के सामने बड़ी चुनौती यह रही है कि वह श्रीलंका की सरकार से उसे लागू करवाएं । इसके विपरीत श्रीलंका ने अपनी राजनीतिक व्यवस्था में सिंहली राष्ट्रवाद की स्थापना कर और भारत विरोधी वैदेशिक ताकतों से संबंध मजबूत करके भारत पर दबाव बढ़ाने की लगातार कोशिश की है जिससे वह तमिलों को लेकर अपने पड़ोसी देश से सौदेबाज़ी कर सके । फ़िलहाल श्रीलंका अपनी इस नीति में सफल होता दिखाई दे रहा है ।

बदहाल वेनेजुएला के लोकतांत्रिक सबक,venejuela

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  जनसत्ता              ·          दुनिया में तेल की कीमतों का निर्धारण करने वाला लातिन अमेरिकी देश वेनेजुएला इस समय आर्थिक और राजनीतिक रूप से गहरे संकट में फंस गया है। राजनीतिक सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाएं रखने की कोशिश और अमेरिकी विरोध के बूते वैश्विक जगत में आक्रामक पहचान बनाने की इस देश के नेतृत्व की नीति के दुष्परिणाम यहां के लोगों के लिए जानलेवा हो गए है।   करीब सवा तीन करोड़ की आबादी वाले इस देश के पास अपार खनिज संसाधन है लेकिन इसके बाद भी लगभग 7 लाख लोग ऐसे हैं जिनके पास दो वक्त का खाना खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।  यूनाइटेड नेशन फूड प्रोग्राम एजेंसी के अनुसार वेनेजुएला के हर तीन में से एक नागरिक के पास खाने के लिए भोजन नहीं है। मुद्रा इतनी कमजोर स्थिति में है की वहां के 10 लाख बोलिवर के नोट की भारत में कीमत महज 36 रुपये के बराबर है। दुनिया के कच्चे तेल के सबसे बड़े केंद्र समझे जाने वाले इस देश में महंगाई बेतहाशा बढ़ गई है । देश के कई इलाके पानी की समस्या से जूझ रहे है , मुद्रा संकट बढ्ने से भोजन मिलना बहुत महंगा हो गया है और लोग भूखे रहने को मजबूर है। सुपर बाज़ार पर सरकारी नियंत्

धर्म ग्रन्थ पर सवाल क्यों, 26 aayat vasim rizvi

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  पॉलिटिक्सवाला                                                                 धर्म को देखने की आपकी दृष्टि क्या होना चाहिए,इसका जवाब भारतीय सभ्यता में बखूबी मिलता है । महाभारत काल में यक्ष और युधिष्ठिर के बीच की प्रश्नोत्तरी में जीवन के प्रति दृष्टिकोण का वृहत रूप प्रतिबिम्बित होता है । यक्ष ने जब पूछा की दुनिया में श्रेष्ठ धर्म क्या है तब युधिष्ठिर का जवाब था की दया दुनिया में श्रेष्ठ धर्म है ।   दया की यह श्रेष्ठता दुनिया के सभी धर्मों में प्रधानता लिए हुए है अत: धर्मराज युधिष्ठिर का जवाब युगों युगों से धर्म को देखने की दृष्टि का आदर्श रूप माना जाता है । शिया नेता के रूप में विख्यात वसीम रिजवी ने पवित्र धर्म ग्रंथ कुरान की कुछ आयतों पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है । इस जानहित याचिका में रिजवी ने कुरान से 26 आयतों को हटाने की बात कही है और इसका आधार उन्होंने हिंसा और कट्टरता को बताया है । धर्मनिरपेक्ष भारत की आत्मा में किसी विशेष पहचान पर मानवता की उच्चता को प्राथमिकता दी गई है,ऐसे में रिजवी के धर्म को देखने की दृष्टि पर तो बात की ही जा सकती है । धर्म

देशभक्ति की असंतुलित अवधारणा,deshbhkti tirnga delhi

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    राष्ट्रीय सहारा                          चमचमाती दिल्ली में लोगों के जीवन की खुशहाली का मंत्र अब तिरंगे होंगे। दिल्ली सरकार ने देशभक्ति बजट को आधार बनाकर 45 करोड़ रुपया खर्च करने का प्रावधान   कर यह दावा किया है की दिल्ली में तिरंगे चारों और लगने से लोगों में देशभक्ति की भावना जागेगी। सुशासन समावेशी विकास का मार्ग सुनिश्चित करने की एक अवधारणा है जिसमें खुशहाल जीवन की संकल्पना दिखाई देती है। रोटी , कपड़ा , मकान , शिक्षा और स्वास्थ्य लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के आधार स्तम्भ है लेकिन देखा यह जा रहा है की लोकतंत्र की यह लोकप्रिय अवधारणा अब बदलने लगी है। दरअसल लोकतन्त्र का अत्याधुनिक रूप जनता के शासन , उनकी भागीदारी और लोककल्याणकारी राज्य की अवधारणा की पहचान से आगे निकलने को आमादा है। दुनिया के अनेक देशों में कार्य करने वाली राजनीतिक सत्ताएं  सत्ता परिवर्तन के चुनावी चक्र को तो बनायें रखना चाहती है लेकिन इसके साथ ही सत्ता पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना को उभार देकर एक हथियार की तरह उपयोग कर रही है। बीते दौर में राजतंत्र और अधिनायकवादी शासन व्यवस्थ