मोदी ने बेहतर बनाई अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की छवि,AMU MODI

 

दबंग दुनिया


  

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जब प्रवेश करते है तो इसके द्वार पर लिखी यह पंक्तियां आपका स्वागत करती है,इल्म हासिल कीजिए,माँ की गोद से मौत तक। इस ऐतिहासिक विश्वविद्यालय ने भारत के शिक्षित भविष्य की बुनियाद उस दौर में रखी थी जब गुलामी की जिल्लत युवाओं में सिहरन और निराशा पैदा कर रही थी। हाल ही में इस विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री ने अपने दिलचस्प भाषण में उस दौर को याद भी किया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की उपयोगिता और महत्व की सराहना भी की। दुनिया भर के इस्लामिक देशों से भारत के कूटनीतिक और राजनीतिक संबंधों को बेहतर करने में भी इस संस्थान की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रधानमंत्री मोदी इसका महत्व जानते है और उन्होंने इस विश्वविद्यालय की खूबियों को शानदार तरीके से सबके सामने रखा। 

 

दरअसल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की पहचान दुनियाभर में एक उत्कृष्ट मुस्लिम शिक्षा संस्थान के रूप में होती है और दुनियाभर में मुस्लिम विद्वान यहां से शिक्षा अर्जित कर कई देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैइसे हिंदुस्तान के मुसलमानों की इच्छाओं का केंद्र कहा जाता है लेकिन जो इस शिक्षा संस्थान में पढ़ते है वे यह भली भांति जानते है की इस शिक्षा संस्थान की धर्मनिरपेक्ष और उदारवाद मूल्यों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका रही हैइसकी स्थापना का उद्देश्य स्वाधीनता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय भावनाओं को मज़बूत आधार एवं स्वदेशी शिक्षा को बढ़ावा देना था इसके संस्थापक सर सैय्यद अहमद खां ने जिन संघर्ष और साहस के साथ अलीगढ़ विश्वविद्यालय की नींव रखी वह अनुकरणीय है देश में जब अंग्रेजों के अत्याचार बढ़ रहे थे तब सैयद अहमद खांने असबाब-ए-बगावत-ए-हिन्द किताब लिखकर मुसलमानों को स्वतंत्रता की भारतीय चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थीधर्म की कट्टरपंथी ताकतों पर सीधा प्रहार करते हुए सर सैयद ने लोगों से यह कहने से भी गुरेज नहीं किया कि कुरान के उपदेशों को तर्क के आधार पर समझने का प्रयत्न करें

इस संस्थान में शुरुआत से ही अरबी फ़ारसी भाषाओं के साथ-साथ  संस्कृत  कि शिक्षा की भी व्यवस्था की गईसर सैयद अहमद खां इस विश्वविद्यालय के जरिए मुसलमानों समेत सभी समुदायों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना चाहते थेदेश की सर्वोत्तम सुविधाओं से शुमार इस विश्वविद्यालय में तकरीबन 25 फ़ीसदी विद्यार्थी गैर मुसलमान पढ़ते हैयहाँ संस्कृत का विभाग बेहद ख्यात माना जाता हैपूर्व,पश्चिम,उत्तर,दक्षिण की राजनीति, धर्म,कर्म,विज्ञान,गणित,समाज,अर्थ,मेडिकल,इंजीनियरिंग जैसे सैकड़ों विभाग विद्यार्थियों के लिए पूरी गुणवत्ता के साथ उपलब्ध होते हैयहां की सेंट्रल लायब्रेरी दुनिया की अहम लायब्रेरी मानी जाती हैयहाँ पर महाभारत  का फारसी अनुवाद भी है तो भारतीय संस्कृति और सभ्यता से संबंधित कई पांडुलिपियां भी उपलब्ध है यहां अकबर के दरबारी फैजी की फारसी में अनुवादित गीता है तो तमिल भाषा में लिखे भोजपत्र भी सहेज कर रखे गए है

शिक्षा का स्तर भी इतना जबरदस्त की देश के तीसरे राष्ट्रपति जाकिर हुसैन,कैफ़ी आजमी,न्यायविद आर.पी.सेठी,मशहूर इतिहासकार ईश्वरी प्रसाद और इरफ़ान हबीब,भौतिक शास्त्री पियारा सिंह गिल जैसी अनेक नामी गिरामी हस्तियां यहां से निकली हैहॉकी के जादूगर  ध्यानचंद ने कलाइयों से कमाल करना इसी विश्वविद्यालय से सीखा था। खान अब्दुल गफ्फार खान की शिक्षा भी अलीगढ़ मुस्लिम  विश्वविद्यालय में ही हुई थी। उनके देश प्रेम के बारे में कहा जाता है कि  वह ऐसे हिन्दुस्तानी थे जिसकी हर साँस में एहले वतन डोलता था। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खुदाई खिदमतगार और लाल कुर्ती आंदोलन छेड़कर पठानों को लामबंद करने वाले खान अब्दुल गफ्फार खान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शिखर नेता रहे।धर्म के नाम पर मुसलमानों के लिए अलग पाकिस्तान देश बनने का पूरी उम्र उन्होंने खूब विरोध किया। लोग इस विश्वविद्यालय को मुस्लिम इच्छा का केंद्र समझते है लेकिन सर सैयद अहमद खां से जिस नीव पर यह इमारत खड़ी की है उससे प्रतीत होता है कि भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने में इस संस्थान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पिछले कुछ वर्षों से देखने में आया है की अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को राजनीतिक कारणों से उभारने और निशाना बनाने की घटनाएं लगातार सामने आई है। इससे इस विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। कुछ विवादों को आधार बनाकर एक स्वर्णिम शिक्षा संस्थान का गौरव धूल धूसरित करना देश और समाज के लिए नुकसानदायक है। जबकि भारत के बहुसांस्कृतिक समाज और साझा संस्कृति को मजबूत करने में यह संस्थान बहुमूल्य योगदान देता रहा है। कोरोनाकाल में भी एएमयू ने हजारों लोगों का मुफ्त टेस्ट किया, आइसोलेशन वार्ड बनाएं,प्लाज्मा बैंक बनाएं और इन सबके साथ ही पीएम केयर फंड में बड़ी राशि का योगदान भी दिया स्पष्ट है की अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय लगातार अपने कार्यों और दायित्वों से समाज और राष्ट्र की सेवा के प्रति सजग रहकर अपनी प्रतिबद्धता दिखाता रहा है। 

इस समय दुनिया कट्टरपंथ से बूरी  तरह से जूझ रही है ऐसे में इसके संस्थापक सर सैयद अहमद खां के विचार और उद्देश्य इस समय ज्यादा प्रासंगिक हो जाते है,उन्होंने कट्टरपंथ का जवाब आधुनिक शिक्षा को माना था इस समय भारत की एकता और अखंडता के समक्ष कई चुनौतियां है,इससे राष्ट्र जूझ भी रहा है। अभी भी भारत में सांप्रदायिकता की चुनौतियां किसी भी स्तर से कम नहीं हुई है,ऐसे में हमारी साझी संस्कृति को मजबूत करने की बड़ी जरूरत है  प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में इस चिंता को साझा  करते हुए कहा भी की पिछली शताब्दी में मतभेदों के नाम पर काफी वक्त खराब हो गया है, लेकिन अब वक्त ना गंवाते हुए नये भारत,आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करना है।

बहरहाल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का शताब्दी समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक रहा मोदी ने इसके स्वर्णिम इतिहास को सामने लाकर न केवल विश्वविद्यालय की छवि को बेहतर बनाया बल्कि समाज को समन्वय और विकास के संदेश भी दिए  जिसकी इस समय राष्ट्र को बड़ी जरूरत है

 

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