बुधवार, 18 नवंबर 2020

इंदिरा मतलब शक्तिशाली भारत,indira bharat

 

नया इंडिया

                                            

                   

1965 में जब  इंदिरा गांधी को रोमन अकादमी द्वारा कुशल कूटनीतिज्ञ महिला होने का इजाबेला-द–एस्ते पुरस्कार से सम्मानित किया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इसकी सराहना करते हुए यह स्वीकार किया था कि कूटनीतिक क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों से कही आगे है। लाल बहादुर शास्त्री की अकस्मात मृत्यु के बाद 24 जनवरी 1966 को इंदिरा गांधी ने देश की तीसरी प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली और उसके बाद दुनिया में उन्होंने भारत कीसॉफ्ट पॉवर की छवि बदलकर अग्रगामी बना दिया। अमेरिका की पाकिस्तान परस्त नीति के जवाब में इंदिरा गांधी ने अपने राष्ट्रीय हितों को आगे कर गुटनिरपेक्षता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। 1970 में भारत ने पूंजीवाद और साम्यवाद की कटुता को नजरअंदाज कर सोवियत संघ के साथ पांच वर्षीय व्यापार समझौता किया जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्रों में मजबूती मिल सके। उन्होंने साम्यवादी खेमे में जाने के वैश्विक आरोपों को झेलने का साहस दिखाते हुए हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए 1971 में सोवियत संघ के साथ शांति,मैत्री और सहयोग के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। उस समय यह समझौता भारतीय सुरक्षा और संप्रभुता के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। इस संधि से यह सुनिश्चित किया गया था कि भारत के विरुद्द किसी आक्रमण की अवस्था में यह साम्यवादी देश भारत की सुरक्षा करेगा।यह राष्ट्रीय स्वाभिमान ही था कि इंदिरा गांधी ने अमेरिका के वियतनाम पर हमलों की कड़ी आलोचना करते हुए भारत में पांच स्थानों पर अमेरिकी सूचना केन्द्रों  को बंद करवा दिया। यहीं नहीं भारत ने उत्तर वियतनाम की राजधानी हनोई में भारतीय कार्यालय के दर्जे को ऊँचा करने की घोषणा कर महाशक्ति अमेरिका के दंभ को चुनौती देने से भी परहेज नहीं किया।

1971 में पूर्वी पाकिस्तान की मुक्ति वाहिनी को भरपूर समर्थन देकर महज चौदह दिनों तक युद्द करके पूर्वी पाकिस्तान का नामोनिशान मिटाने का कारनामा इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है और इसका श्रेय इस महान नेता की आक्रामकता और दूरदर्शिता को जाता है। कहते है भूगोल कभी बदला नहीं जा सकता,लेकिन इंदिरा गांधी ने अपने दृढ इरादों से दुश्मन देश के दो टुकड़े करके बांग्लादेश को स्थापित कर दिया। भारत को पूर्व और उत्तर से घेरने वाले पाकिस्तान को उत्तर तक सीमित करके भारत ने उस पर सदा के लिए निर्णायक बढ़त हासिल कर ली। पाकिस्तान को एक क्षेत्र से पूरी तरह काट देने से भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के निर्धारण में मदद मिली और इसका लाभ भारत को राष्ट्रीय समृद्धि और विकास में लगातार मिल रहा है। जबकि पाकिस्तान का एक बड़ा उपजाऊ और खनिज संसाधनों से परिपूर्ण भाग उसके हाथ से छूट गया जिससे अब वह कंगाल होने की कगार पर पहुंच गया है।

चीन के प्रभाव को लेकर इंदिरा गांधी के मन में गहरी टीस थी। 1971 के युद्द में कूदने से पहले इंदिरा ने सोवियत रूस से प्रतिरक्षा का समझौता कर चीन पर नकेल कस दी। इसी कारण चीन और अमेरिका 1971 के युद्द में अपने पारम्परिक पारपरिक दोस्त पाकिस्तान की मदद करने में असहाय रहे। प्रतिरोधकता की अवधारणा को इंदिरा गांधी ने भारत के लिए बेहद जरूरी समझा और इसी का परिणाम आणविक शक्ति के रूप में सामने आया। 18 मई 1974 को प्रथम परमाणु विस्फोट कर भारत विश्व राजनीति का एक बड़ा ख़िलाड़ी बन गया। यह विस्फोट अंतर्राष्ट्रीय शक्ति संतुलन के लिए मिल का पत्थर साबित हुआ। भारत चीन संघर्ष से भारत को अपनी परम्परागत शांतिपूर्ण सह अस्तित्व को त्यागने और आधुनिक अस्तित्व को बनाने की  प्रेरणा मिली। इंदिरा गांधी के सैन्यीकरण की नीति के कारण ही भारत आज दुनिया की अग्रणी सैन्य शक्तियों में शुमार है।

भारत की इस महान नेता ने अमेरिका,चीन और पाकिस्तान को एक और घाव दिया। दरअसल पूर्वी हिमालय में एक छोटा सा राज्य सिक्किम है।इस पर नामग्याल वंश का शासन हुआ करता था। इसके राजा चोग्याल की पत्नी होप अमेरिकी थी।चोग्याल की चीन,नेपाल,पाकिस्तान और अमेरिका से बड़ी नजदीकी थी। 1962 के भारत चीन युद्द से भारत को बहुत सीख मिली थी भारत के सामरिक विशेषज्ञों ने महसूस किया कि चीन की चुंबी घाटी के पास भारत की सिर्फ़ 21 मील की गर्दन है जिसे 'सिलीगुड़ी नेक'कहते हैं चुंबी घाटी के साथ ही लगा है सिक्किम भारत को लगता था कि चीन चाहें तो एक झटके में उस गर्दन को अलग कर उत्तरी भारत में घुस सकते हैं इस प्रकार सिक्किम को भारत में शामिल किए जाने की सोच 1962 में भारत चीन युद्ध के बाद शुरू हुई इंदिरा गांधी ने इस योजना को बहुत ही गोपनीयता और साहस से अंजाम दिया छह अप्रैल, 1975 की सुबह सिक्किम के चोग्याल को अपने राजमहल के गेट के बाहर भारतीय सैनिकों के ट्रकों की आवाज़ सुनाई दी वह दौड़ कर खिड़की के पास पहुंचे उनके राजमहल को चारों तरफ़ से भारतीय सैनिकों ने घेर रखा था5,000 भारतीय सैनिकों ने महज आधे घंटे में राजमहल के 243 गार्डों को काबू करके उस पर अधिकार जमा लिया भारत ने सिक्किम का आज़ाद देश का दर्जा ख़त्म  कर चोग्याल को उनके महल में ही नज़रबंद कर दिया गया जब सिक्किम के भारत में विलय की मुहिम शुरू हुई तो चीन ने इसकी तुलना 1968 में रूस के चेकोस्लोवाकिया पर किए गए आक्रमण से कीतब इंदिरा गांधी ने चीन को तिब्बत पर किए उसके आक्रमण की याद दिलाई दुनिया को दिखाने के लिए इंदिरा गाँधी ने वहां जनमत संग्रह करवा कर और चोग्याल की प्रासंगिकता समाप्त कर भारत में विलय को मोहर लगवा दी सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाने का संविधान संशोधन विधेयक 23 अप्रैल, 1975 को लोकसभा में पेश किया गया उसी दिन इसे 299-11 के मत से पास कर दिया गया राज्यसभा में यह बिल 26 अप्रैल को पास हुआ और 15 मई, 1975 को राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने इस बिल पर हस्ताक्षर कर भारत की सीमाओं के विस्तार पर मोहर लगा दी

1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े करके इंदिरा गाँधी ने दुश्मन देश को जो घाव दिया था,वह उनके लिए नासूर बन गया थाजुल्फिकार अली भुट्टों को फांसी पर चढ़ाकर भी पाक हुक्मरानों की आग ठंडी नहीं हुई तो उन्होंने खालिस्तान के नाम पर सिख आतंकवाद को बढ़ावा देना प्रारंभ किया पाकिस्तान की यह चाल कामयाब रही और पंजाब आतंकवाद की आग में जलने लगा पाक की शह पर 1984 में सिक्ख चरमपंथी जरनैलसिंह और उसके समर्थकों ने सिक्खों के सबसे पवित्र स्थान अमृतसर स्थित विश्वप्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर पर कब्ज़ा कर भारतीय एकता,अखंडता और संप्रभुता को चुनौती दे डालीलेकिन इंदिरा गाँधी राष्ट्र हित के लिए किसी भी कदम को उठाने से कभी पीछे हटती नहीं थी उन्होनें स्वर्ण मंदिर से आतंकियों को खदेड़ कर पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया को यह सन्देश दिया की भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने की किसी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा

 

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brahmadeep alune

aakashwani sanvidhan koumi ekta Aajkal- 23rd November