गुरुवार, 10 सितंबर 2020

बॉलीवुड की संतान है अंडरवर्ल्ड, bollywood-underworld

प्रदेश टुडे              

                   


 

माया नगरी मुंबई और माफिया तस्करों के रिश्ते बहुत मजबूत और पुराने है एक दौर में मुंबई और दुबई नशे के व्यापार के दो बड़े केन्द्रों के रूप में  जाने जाते थे और हाजी मस्तान के बाद दाउद इब्राहीम को नशे के कारोबार का बेताज बादशाह माना जाता था अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहीम का ड्रग्स का कारोबार पूरी दुनिया में फैला हुआ है। ड्रग माफिया इकबाल मिर्ची से लेकर अभिनेत्री ममता कुलकर्णी के पति विक्की गोस्वामी तक उसके रिश्ते कभी किसी से छिपे नहीं रहे। दाऊद अपने नशे के कारोबार से मोटा पैसा कमा रहा है और इस पैसे को पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में निवेश कर रहा है  पाकिस्तान के हबीब बैंक पर अमेरिका के वित्तीय सेवा विभाग ने 2017 में मनीलॉन्ड्रिंग और आतंकियों को पैसा पहुंचाने का आरोप भी लगाया था,यह बैंक नेपाल में भी आतंकियों को पैसे पहुंचाता था वास्तव में पाकिस्तान स्थित आतंकियों के वित्तीय लेनदेन पर नजर रखना मुश्किल है क्योंकि यह नगद पर आधारित होता है और इसमें मादक पदार्थों की तस्करी शामिल है। पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति इसके लिए मुफीद है। भारत,पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच गोल्डन क्रिसेंट या सुनहरे अर्द्ध चंद्रमा का इलाका है जो अफीम का स्वर्ग कहा जाता है और नार्को आतंकवाद की यह उपजाऊ जमीन मानी जाती है।



पाकिस्तान से यह ड्रग भारत आता है और इस प्रकार भारत में नशे के कारोबार को बेहद चालाकी और सावधानी से चलाया जाता है। इसमें पांधी की भूमिका होती है। “पांधी” ड्रग तस्करी की दुनिया में बेहद विश्वसनीय नाम है,ये वे एजेंट होते है,जो सीमा पार से आने वाले ड्रग को देश के विभिन्न स्थानों से बेहद विश्वसनीयता से पहुंचाते है। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों को कमीशन दिया जाता हैइन्हें इसके सरगना या इस धंधे शामिल अन्य लोगों की कोई जानकारी नहीं होती और यही कारण है कि ड्रग्स के सरगना को पकड़ना आसान नहीं है। पैसे की चमक दमक इतनी की ट्रक ड्रायव्हर आसानी से मादक पदार्थों के एजेंटों के जाल में फंस जाते है. चाय,गैस,कोयला या अन्य मॉल ढोने वाले ट्रकों में गांजा पकड़े जाने की कई घटनाएं सामने आई है।



80 के दशक में तस्करी से बनने वाली फिल्मों को बहुत सफलता मिली थी और रुपहले पर्दे पर डॉन का कथित किरदार निभाकर लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ने वाले कलाकारों में अमिताभ बच्चन जैसे महानायकों को शुमार किया जाता है। माना जाता है कि इन फिल्मों को देखकर ही दाउद इब्राहीम को प्रेरणा मिली जिसका कितना पैसा इस समय बॉलीवुड में लगा है यह पता कर पाना बहुत मुश्किल है। नशे के व्यापार को लेकर लंबे समय तक मुम्बई में कुख्यात गैंगस्टर हाजी मस्तान का सिक्का चलता था,जिसके बारे में कहा जाता था कि वह बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाला शख्स था जो महज आठ साल की उम्र में तमिलनाडु से मुंबई  आया था। फूटपाथ पर जिंदगी बसर करते हुए उसने मुम्बई में उसने एक स्लम एरिया को अपना ठिकाना बनाया। यहां उसकी मुलाकात एक अरब के रहने वाले शख्स से हुई जो तस्कर था

इसके बाद मस्तान का सितारा ऐसा बुलंद हुआ कि वह मुम्बई का अंडरवर्ल्ड का बेताज बादशाह बन गया फ़िल्मी कलाकारों से उसके सम्बन्ध और राजनेताओं पर उसका प्रभाव कमाल का था  तस्करी की इस राह पर चल कर वो अमीरी की ऊंचाइयों तक पहुंच गया एक दौर में मस्तान का मुम्बई में इतना नाम था कि उसका काम करने में कोई रुकावट नहीं होती थी, वह पुलिसवालों और बाकी अधिकारियों को वह खूब तोहफे देता था दाउद इब्राहीम समेत कई गैंगस्टरों का गुरु हाजी मस्तान को ही माना जाता है



दरअसल बॉलीवुड की बेहिसाब चमक दमक में अंडरवर्ल्ड की बेतहाशा अवैध कमाई की भूमिका सामने आती रही है और नशे के व्यापार से आने वाला पैसा यहां लगाने के तथ्य भी सामने आये हैयह भी बेहद दिलचस्प है कि मादक पदार्थों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पर्दे के पीछे यह स्वीकार करती है कि उनके द्वारा तस्करी का जो मॉल पकड़ा जाता है वह 2 फीसदी भी नहीं होता। साफ़ है कि मादक पदार्थों की तस्करी भारत में बड़ा व्यापार है बल्कि उसका उसका ढांचा इतना मजबूत है कि उसे खत्म किया जाना आसान नहीं है। देश के कई उद्योगपतियों और राजनेताओं को रियल स्टेट और स्टॉक एक्सचेंज में अपना व्यवसाय चलाने के लिए ढेर सारा पैसा चाहिए और उसका सबसे बड़े माध्यम मादक पदार्थों की तस्करी है। जिसमें उद्योगपतियों,राजनेताओं,पुलिस के चुनिंदा आला अधिकारियों और अपराधियों का मजबूत गठजोड़ होता है। 2016 में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ड्रग्स तस्करी पर एक आंकड़ा साझा किया था जिसमें पुलिस और सुरक्षा से जुड़े जवानों के ड्रग्स तस्करी में उनकी संलिप्तता के आरोप में गिरफ़्तारी की बात कही गई थी।



नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2 करोड़ लोग अफीम,3 करोड़ से ज्यादा गांजा और पूरे देश में करीब 8.5 लाख लोग ड्रग्स इंजेक्ट करते हैंभारत में इस समय कैनाबिस से लेकर ट्रामाडोल जैसी नशीले पदार्थों का उपयोग हो रहा है देश में ड्रग्स पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल सीमा के माध्यम से या फिर अफ्रीका से होकर भारत पहुंचता हैफिर इन्हें दिल्ली या पंजाब लाया जाता है और फिर यह पूरे देश में फ़ैल जाता है, करोड़ो लोगों तक यह जानलेवा नशा कैसे पहुँचता है,इसको लेकर ख़ामोशी है।



बहरहाल सुशांत मामले में रिया,शौविक चक्रवर्ती की गिरफ़्तारी और कन्नड़ फ़िल्मों की अभिनेत्री की गिरफ़्तारी से फिल्म इंडस्ट्री में ड्रग्स के इस्तेमाल और इनके कारोबार को लेकर चर्चा हो रही हैक्या ऐसी कोई जांच इतनी पारदर्शिता से काम कर सकती है जो उद्योगपतियों,राजनेताओं,पुलिस के चुनिंदा आला अधिकारियों और अपराधियों के मजबूत गठजोड़ को चुनौती दे सके। जाहिर है बॉलीवुड में लगने वाली बेतहाशा दौलत की जांच किये बिना ड्रग माफियाओं तक पहुंचना मुमकिन नहीं है

1 टिप्पणी:

dr.mehar ने कहा…

अद्धभुत लेख सर। saadhuvaad

brahmadeep alune

संकट में नेपाल की वामपंथ राजनीति, nepal vampanth

जनसत्ता                                                     https://epaper.jansatta.com/c/55101595 संकट में नेपाल की वामपंथ राजनीति.......