पोस्ट

सितंबर, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कूटनीतिक आक्रामकता से दूर भारत,kutnitik bharat

इमेज
      सुबह सवेरे        कूटनीतिज्ञों का अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा महत्व रहा है । कुशल तथा सक्रिय कूटनीति,एक देश की शक्ति को किस प्रकार घटा-बढ़ा सकती है इसका स्पष्ट उदाहरण संयुक्तराष्ट्र की आमसभा की बैठक में देखने को मिला । तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने इसराइल पर फ़लस्तीनियों के साथ अत्याचार का आरोप लगाया तो अर्दोआन के उस भाषण के बीच संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के राजदूत गिलाड इर्दान बाहर चले गए ।   उन्होंने अर्दोआन के भाषण का न केवल बहिष्कार किया   बल्कि उन पर यहूदी विरोधी होने का आरोप लगाते हुए उन्हें झूठा भी बताया । इसी भाषण में तुर्की के राष्ट्रपति ने कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के काले प्रचार को बढ़ावा देते हुए भारत की कड़ी आलोचना भी की । लेकिन इसका जवाब भारत के द्वारा उच्च राजनयिक स्तर पर न देते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि टीएस त्रिमूर्ति ने दिया,उन्होंने इसे भारत के आंतरिक मामले में तुर्की का हस्तक्षेप बताया और भारत का विरोध यही पर समाप्त हो गया । इसके पहले पिछले साल भी संयुक्तराष्ट्र की महासभा में अर्दोआन ने भारत की कश्मीर को लेकर आलोचना की थी

संकट में नेपाल की वामपंथ राजनीति, nepal vampanth

इमेज
जनसत्ता                                                     https://epaper.jansatta.com/c/55101595 संकट में नेपाल की वामपंथ राजनीति.......... साम्यवादी सरकारें संस्कृतिवाद को दरकिनार कर वैचारिकतावाद के बाहुपाश में जकड़ने को बैचेन रहती है,चीन और नेपाल की राजनीति में यह बखूबी देखा जा सकता है । हिमालय से जुड़े भारत और नेपाल के आपसी संबंधों का मजबूत आधार ऐतिहासिक तौर पर सांस्कृतिक सामीप्य रहा है,जिसे नेपाल के वर्तमान प्रधानमंत्री चुनौती देकर लगातार समस्याएं बढ़ा रहे है । कम्युनिस्ट   पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली चीन से इतने प्रभावित है कि मंत्रिमंडल की बैठक से लेकर राजनीतिक प्रशिक्षण तक में चीन की भागीदारी होने लगी है । ऐसा लगता है कि शी जिनपिंग और ओली,अपने देश की घरेलू राजनीति में साम्यवादी कट्टरता को मजबूत करके सत्ता में बने रहना चाहते है । इन सबके बीच नेपाल और चीन की आंतरिक राजनीति का मिजाज़ अलग अलग है। चीन में जनवादी लोकतंत्र का आक्रामक स्वरूप है जिसे अभिव्यक्ति की आज़ादी से परहेज है,वहीं नेपाल का उदार समाज सत्ता की   निरंकुशता से अपने धार्मिक स्वभाव को बदल दे,यह स

फासीवादी पूंजीवाद के जंजाल में उलझते लोकतंत्र,fansivadi punji

इमेज
  राष्ट्रीय सहारा                                            ब्रिटिश लेबर पार्टी के चेयरमेन और 20 सदी के महान राजनीतिक अर्थशास्त्री हेराल्ड लास्की ने फासीवाद का विश्लेष्ण करते हुए कहा था कि फासीवाद का असल उद्देश्य आर्थिक शक्ति के उपकरणों के स्वामियों के हित में उदार विचारों और संस्थाओं का विनाश करना है। जिससे पूंजीवाद को सशक्त किया जा सके।” लोकतंत्र को फासीवाद का जवाब माना   जाता है लेकिन दुनिया के कई देशों में लोकतांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकारें जिस प्रकार बाज़ार में एकाधिकार के लिए पूंजीवादियों को संरक्षण दे रही है,उससे फासीवादी प्रवृतियां बिल्कुल नये रूप में सशक्त होकर सामने आ रही है। रूस की सत्ता में बने रहने के लिए व्लादिमीर पुतिन ने पूंजीपतियों को छूट देकर ये तय कर दिया कि मुल्क के सियासी मामलों में अब वे दखल नहीं दे सकेंगे । इससे पूंजीपति अपनी दौलत सुरक्षित रखने और उसे बढ़ाने में कामयाब तो हो रहे है लेकिन इससे रूस में उदारवाद का अंत हो गया । रूस में पुतिन की लोकप्रियता तो शिखर पर है लेकिन इसके साथ ही रूस में उन्हें एक ऐसे राष्ट्रपति के तौर पर देखा जाने लगा जिसका लोकतंत्र क

बॉलीवुड की संतान है अंडरवर्ल्ड, bollywood-underworld

इमेज
प्रदेश टुडे                                      माया नगरी मुंबई और माफिया तस्करों के रिश्ते बहुत मजबूत और पुराने है । एक दौर में मुंबई और दुबई नशे के व्यापार के दो बड़े केन्द्रों के रूप में   जाने जाते थे और हाजी मस्तान के बाद दाउद इब्राहीम को नशे के कारोबार का बेताज बादशाह माना जाता था । अंडरवर्ल्ड डॉन   दाउद इब्राहीम का ड्रग्स का कारोबार पूरी दुनिया में फैला हुआ है। ड्रग माफिया इकबाल मिर्ची से लेकर अभिनेत्री ममता कुलकर्णी के पति विक्की गोस्वामी तक उसके रिश्ते कभी किसी से छिपे नहीं रहे। दाऊद अपने नशे के कारोबार से मोटा पैसा कमा रहा है और इस पैसे को पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में निवेश कर रहा है ।   पाकिस्तान के हबीब बैंक पर अमेरिका के वित्तीय सेवा विभाग ने 2017 में मनीलॉन्ड्रिंग और आतंकियों को पैसा पहुंचाने का आरोप भी लगाया था,यह बैंक नेपाल में भी आतंकियों को पैसे पहुंचाता था । वास्तव में पाकिस्तान स्थित आतंकियों के वित्तीय लेनदेन पर नजर रखना मुश्किल है क्योंकि यह नगद पर आधारित होता है और इसमें मादक पदार्थों की तस्करी शामिल है। पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति इसके लिए मुफीद है।

इस्लामिक दुनिया में पस्त पड़ा पाकिस्तान,islamik duniya pakistan

इमेज
  प्रजातंत्र        डॉ.ब्रह्मदीप अलूने           बेनजीर भुट्टो बताया करती थी कि जब उनके पिता जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे और जब भी कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष से वे मिलते थे,उस समय बेनजीर स्वयं जाकर अपने पिता से किसी प्रतिद्वंदी राष्ट्राध्यक्ष का फोन आने की बात कहती थी । जुल्फिकार अली भुट्टो बेनजीर से यह कहा करते थे की अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में कभी किसी को पता ही नहीं चलना चाहिए की हम किसके साथ है और यह असमंजस हमेशा बना रहना चाहिए । दरअसल पाकिस्तान के नीति निर्माताओं ने दुनिया से अपने रिश्तों को आमतौर पर सामरिक दृष्टि से देखा और बदलते दौर के साथ यह नीति स्वयं उनके देश के लिए ही आत्मघाती बन गई। पाकिस्तान भारत विरोध के जूनून में यह समझने में नाकाम रहा कि आधुनिक समय में अंतर्राष्ट्रीय जगत में सैनिक शक्ति के स्थान पर आर्थिक हित महत्वपूर्ण हो गए है और राष्ट्रों के बीच परस्पर सहयोग और पारस्परिक हितों की भावना को प्रमुखता प्राप्त है । अत: अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का स्वरूप भी परिवर्तित हो गया है । कूटनीति की दुनिया में पल प्रतिपल बदलती परिस्थितियों   के बीच ईरान स्थ