अलौकिक अयोध्या में अद्वितीय अभिनंदन, ayodhya abhinndann

दबंग दुनिया

                         अलौकिक अयोध्या में अद्वितीय अभिनंदन

                                                                                 डॉ.ब्रह्मदीप अलूने

                                                                  

अयोध्या का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि अनादिकाल से जब भी भारत के तीर्थों का उल्लेख होता है तब उसमें सर्वप्रथम अयोध्या का ही नाम आता है। दरअसल अयोध्या भारतीय सभ्यता और संस्कृति की वह धरोहर और पहचान है से जिसमें  भारतवर्ष और यहां के निवासियों का जीवन दर्शन प्रतिबिम्बित होता है। सुख शांति और ऐश्वर्य की इस भूमि के बारे में कहा जाता है कि जहां कभी युद्द न होता उस भूमि को अयोध्या कहते हैभारतीय सभ्यता के विकास में सप्तपुरी का बड़ा योगदान माना जाता है और अयोध्या उन सप्तपुरियों में शामिल है जहां मोक्ष प्राप्त होने का प्राचीन भारतीय ग्रंथों में उल्लेख है वेदों में अयोध्या को ईश्वर की नगरी बताया गया है और इसीलिए जनमानस के लिए  यह समूची नगरी आस्था का केंद्र रही है 

युगों युगों से भारत का जनमानस राम राज्य को अपने जीवन और न्याय का आधार मानता है और इसे साकार करने  वाले अयोध्या के राजा श्रीराम लोकाचार के आदर्श माने जाते है। राम के चरित्र की विशेषता धैर्य है,जिसके कारण उनका नाम जन जन की जिह्वा पर विद्यमान हैमानवीय सम्बन्धों के आदर्श रूप राम युगों युगों से भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को अभिव्यक्त करते रहे है


धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से अयोध्या की महत्ता अब भव्यता में भी दिखाई देगी और यह राम में विश्वास रखने वाले करोड़ों भक्तों के लिए अद्भुत अनुभव होगा,जिसका इंतजार युगों युगों से भारतीय समाज कर रहा था भारत भूमि के आराध्य राम की जन्मस्थली अयोध्या को पीले रंग से सजाया गया है,घर घर और सभी दीवारों पर यह रंग चढ़ गया है,आप जहां भी जाएंगे,पीले रंग सभी दूर दिखाई देगा  भारतीय समाज में पीले रंग को भक्ति,आराधना,वैभव,प्रसन्नता और शौर्य का प्रतीक माना जाता है और इसीलिए अयोध्या के सब दरवाजे भगवा कर दिए गए हैंपीला रंग सूर्य का है जिसे अंधकार मिटाने के लिए माना जाता है,ऐसा लगता है कि अयोध्या नगरी समूचे राष्ट्र में अंधकार को मिटाने और प्रकाशमय होने का संदेश दे रही है शरीर को मजबूत करने में पीले रंग की किरणों का अहम योगदान है,अत: इस दृष्टि से भी राष्ट्र की नवचेतना और सामर्थ्य यहां दिखाई रहा है पीला रंग बुद्धि वर्धक माना जाता है,पीला रंग ज्ञान और विद्वत्ता का प्रतीक है। भारतीय ज्ञान की वैश्विक पहचान के रूप में भी अयोध्या को विकसित किया जा रहा है,अंततः लोकतंत्र का आदर्श रूप राम राज्य से ही माना जाता है,अयोध्या से राम राज्य की कल्पना हुई थी और यह विद्वत राजधर्म का सुचारू संचालन सुनिश्चित करता है पीला रंग सूर्यदेव,मंगल और बृहस्पति जैसे ग्रहों का भी प्रतिनिधित्व करता है स्पष्ट है कि अयोध्या को जिस प्रकार सभी लोको में सर्वश्रेष्ठ नगरी माना जाता है,उसके दर्शन भी यहां हो,इसके बेहतरीन प्रयास किये गये है। आने वाले समय में अयोध्या सर्व सुविधायुक्त ऐसा नगर होगा,जो न केवल धार्मिक दृष्टि से आकर्षण का केंद्र होगा,बल्कि दुनिया के आकर्षक स्थानों में भी शुमार किया जायेगा, सरकार की उत्कृष्ट और बहुआयामी योजना से इसकी उज्ज्वल संभावना बन गई है।


पीले रंग से  सजी अयोध्या राम की जन्मस्थली है और राम को सर्व समर्थ,सर्वत्र विद्यमान रहने वाली सर्वोच्च शक्ति माना जाता है। राम उच्च मानवीय मूल्यों और आदर्शों के प्रति सदैव प्रतिबद्द और समर्पित रहे,इसलिए भारत भूमि पर एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में  उन्हें पूजा जाता है,राम के प्रति अनंत आस्था भारत वर्ष की पहचान रही हैमाना जाता है कि राम के प्रति भक्ति भाव से जीवन बल,बुद्धि ज्ञान,योग को सिद्धि प्राप्त होती है। अपने भक्तों के प्रति राम की आसक्ति का वर्णन वाल्मीकि रामायण में मिलता है जब राम अपने भक्त वीर हनुमान से प्रसन्न होकर कहते है कि,जब तक मेरी कथा संसार में होगी,तब तक तुम्हारी कीर्ति अमिट रहेगी। भगवान राम की जन्मस्थली पर उनके अनन्य भक्त हनुमान की पूजा का विशेष महत्व है। अयोध्या,राम भक्तों के लिए प्रमुख धाम है और हनुमान गढ़ी की पूजा अनिवार्य मानी जाती है। अयोध्या में परंपरा के मुताबिक, राम जन्मभूमि स्थल की हर पूजा से पहले हनुमान निशान राम जन्मभूमि स्थल में जाता है अगर कोई शुभ कार्य होता है, तो हनुमान निशान की पूजा पहले की जाती हैभारत में जन जब भी राम का स्मरण किया जाता है,हनुमान द्वारा की गई राम भक्ति में उच्च मानवीयता के भाव और समर्पण की मिसाल अवश्य भावों में होती है अद्भुत रामायण में एक जगह उल्लेख मिलता है की एक सुबह हनुमान जी को भूख लगी तो वे माता जानकी के पास पहुंचे। माता की मांग में सिंदूर देखकर हनुमान ने आश्चर्य चकित होकर पूछा,माता आपने यह क्या और क्यों लगा रखा है। इस पर माता जानकी ने उन्हें बताया कि,पुत्र,यह सुहागिन स्त्रियों का प्रतीक,मंगल सूचक,सौभाग्य वर्धक सिंदूर है,जो स्वामी की दीर्घ आयु के लिए जीवन पर्यन्त लगाया जाता है।”हनुमान थे तो स्वामी भक्त,उन्होंने अपने स्वामी श्री राम को अजर अमर करने के लिए सारे शरीर पर ही सिंदूर लगा लिया। वास्तव में भगवान राम के आदर्शों को हनुमान अजर अमर रखना चाहते थे और उनकी गुरु की प्रति प्रतिबद्धता दिखाई भी पड़ती है।

 

बहरहाल अयोध्या जगमगा रहा है, यह राम भक्तों के लिए अनुपम और अद्वितीय धरोहर की तरह होगा जहां राम भक्त हनुमान जी की आराधना भी भव्य राम मंदिर के भूमि पूजन के महोत्सव के दौरान होगी। दुनिया भर में रहने वाले करोड़ो राम भक्तों को सहस्त्रों वर्षों से  इस दिन का इंतजार था और पूरे देश में इसे लेकर उत्सव का माहौल है। राम कीर्तन और रामधुन की प्रतिध्वनि गाँव में गाँव में सुनाई दे रही है। अंततः राम मानवीय समाज की वह अनुपम विरासत है जिसे सहेजने,संवारने और बनाये रखने में कई संस्कृतियों और सभ्यताओं का योगदान रहा है यह देश अन्तर्निहित सहिष्णुता की वह जमीन है जहां राम सर्वप्रिय हैअयोध्या में राम मंदिर की भव्यता से निश्चित ही भारतीयों के आत्मविश्वास में असीम वृद्धि होगी और इससे देश का गौरव बढ़ेगा

 


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