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पश्चिम एशिया की नई चुनौतियां, paschim eshiya ki nyi chunoutiyan

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  बदलते अंतराष्ट्रीय परिदृश्य में धार्मिक संरक्षणवाद की परम्परागत नीति से राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना संभव नहीं रहा गया है,अब सामरिक और आर्थिक विवशता के कारण सम्बन्धों के प्रतिमान भी बदलते जा रहे है । दरअसल हाल ही में इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच राजनयिक संबंधों की बहाली को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐतिहासिक घोषणा की तो यह साफ हो गया कि हिंसा,तानाशाही और आतंकवाद   से अभिशिप्त पश्चिम एशिया अरब राष्ट्रवाद को दरकिनार करने को कृतसंकल्पित है । इजराइल विरोधी अरब राष्ट्रवाद का छिन्न भिन्न होना दुनिया के लिए बेहद प्रभावकारी परिणाम लाने वाली घटना हो सकती है। अंतराष्ट्रीय सम्बन्धों के यथार्थवादी सिद्धांत के अग्रणी विचारक हंस मोर्गेंथाऊ ने मजबूत कूटनीति के लिए चार कदम सुझाएं थे,सर्वप्रथम अपने राष्ट्र की राष्ट्रीय शक्ति को दृष्टिगत रखते हुए अपने लक्ष्यों को निर्धारित करना,दूसरा,दूसरे राष्ट्रों की राष्ट्रीय शक्ति और उद्देश्यों का समुचित मूल्यांकन करना। तीसरा,अलग अलग राष्ट्रों के विभिन्न उद्देश्यों के मध्य अनुकूलता और सामंजस्य स्थापित करना तथा चौथा और अंतिम यह कि अपने लक

आज़ादी के दिन महात्मा गांधी का संघर्ष,aazadi,gandhi

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  नया इंडिया                         आज़ादी के दिन महात्मा गांधी का संघर्ष                                                                            डॉ.ब्रह्मदीप अलूने                                                            [लेखक द्वारा लिखित गांधी है तो भारत है का अंश..] महात्मा गांधी ने एक बार प्रार्थना सभा में कहा था कि “मैं जन्म से ही संघर्ष करने वाला हूँ और असफलता को नहीं जानता । ” दरअसल देश के विभाजन का घाव गांधी के लिए असहनीय था लेकिन इसके बाद भी उनके सर्वधर्म समभाव को लेकर प्रयासों में कोई कमी नहीं थी । उन्होंने लंबे संघर्ष के बाद मिल रही आज़ादी के जश्न में शामिल होने से इंकार करते हुए कहा कि वे बंगाल में ही ठीक है और उनकी पहली प्राथमिकता यहाँ जनता के बीच शांति और सद्भाव कायम करना है । भारत को आज़ादी मिली लेकिन गांधी परेशान और बेचैन थे। सांप्रदायिक हिंसा की घृणा और अविश्वास को वे देश के भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे थे। उन्होंने कहा कि”मैंने इस विश्वास में अपने को धोखा   दिया कि जनता अहिंसा के साथ बंधी हुई है।” महात्मा गांधी ने लोगों को

श्रीलंका में भारत की चुनौतियां ,shrilanka,rajpkshe,india

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  जनसत्ता                              श्रीलंका में भारत की चुनौतियां                                                                                                          ब्रह्मदीप अलूने हिन्द महासागर के सिंहली द्वीप में सिंहली राष्ट्रवाद की राजनीति राजपक्षे परिवार को खूब रास आ रही है । उनका राजनीतिक दल प्रतिद्वंदी दलों को बहुत पीछे छोड़ते हुए अब श्रीलंका की सर्वोच्च सत्ता पर काबिज हो गया है । क़रीब एक दशक तक देश के राष्ट्रपति रह चुके महिंदा राजपक्षे चौथी बार देश के प्रधानमंत्री बने है जबकि उनके छोटे भाई गोटाभाया राजपक्षे इस समय श्रीलंका के राष्ट्रपति है । दरअसल भारत के इस पड़ोसी देश ने गृहयुद्द और आंतरिक असुरक्षा का सामना लंबे समय तक किया है,लेकिन इस देश से तमिल पृथकतावादी आंदोलन के खत्म होने के बाद यहां की राजनीति की दिशा ही बदल गई है । पिछले कुछ सालों से श्रीलंका में राष्ट्रवाद की लहर चल पड़ी है और बहुसंख्यक सिंहलियों का विश्वास राजपक्षे बंधुओं पर गहरा हुआ है,जिनकी कड़ी नीतियों से तमिल पृथकतावादी आंदोलन को खत्म कर देश को गृहयुद्द की कगार से उबार लिया गया था । इस समय भी वहां की ज

केमिकल विस्फोट से बढ़ी पर्यावरणीय और आतंकी चुनौती,chamical terrorism lebnan

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  पत्रिका             केमिकल विस्फोट से बढ़ी पर्यावरणीय और आतंकी चुनौती                                                                               डॉ.ब्रह्मदीप अलूने https://www.patrika.com/opinion/chemical-attack-hazards-6330574/ अशांत समन्दर कब तबाही का मंजर पैदा कर दे यह अकल्पनीय होता है,ऐसा ही कुछ रासायनिक भंडार से उत्पन्न अकस्मात खतरों की भयावहता को लेकर भी है जिसके प्रभावों का अंदाजा लगाना मुश्किल है । दरअसल भूमध्यसागर के पूर्वी तट पर स्थित लेबनान ने करीब 7 सालों से राजधानी बेरुत के पोर्ट पर एक गोदाम में अवैध रूप से पकड़े गए साढ़े सत्ताईस हजार टन अमोनियम नाइट्रेट का भंडार जमा कर रखा था । दुनिया भर में कृषि उर्वरक और विस्फोटक के रूप में इस्तेमाल किया जाने वाला अमोनियम नाइट्रेट इतना खतरनाक होता है कि 100 से 150  किलो की इसकी मात्रा से ही विस्फोट हो जाये तो कम से कम तीन किलोमीटर का पूरा इलाका तबाह हो सकता है। अमोनियम नाइट्रेट एक गंधहीन रसायन है,यह साधारण ताप व दाब पर सफेद रंग का क्रिस्टलीय ठोस है। कृषि में इसका उपयोग उच्च-नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक के रूप में तथा विस्फोटकों में