गुरुवार, 21 मई 2020

राष्ट्र के राजीव..rashtra ke rajiv

                                  राष्ट्र के राजीव

                                                                        डॉ.ब्रह्मदीप अलूने  



तरक्की की राह पर रफ्तार से दौड़ते इस देश की युवा पीढ़ी डिजिटल क्रांति के बूते आसमान की ऊँचाइयों को छूती हुई नित नये कीर्तिमान स्थापित कर रही है। अब इस देश में उत्कृष्ट शिक्षा भी है और हम संचार,गैर पारंपरिक ऊर्जा संसाधन,आणविकऊर्जा,सुपरकण्ड्क्टर,कम्प्युटर,बायोटेक्नोलोजी,इलेक्ट्रॉनिक्स,सागर विज्ञान,रक्षा,अंतरिक्ष, क्रायोजेनिक और रक्षा में आत्म निर्भर भी है।  नासा में भी भारतीय है और दुनिया के सबसे उन्नत देश अमेरिका और ब्रिटेन में सबसे ज्यादा डाक्टर भारतीय ही है।



दरअसल डिजिटल क्रांति से अभूतपूर्व परिवर्तन वाले इस भारत को ऐसा बनने की पीछे एक युवा प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की व्यापक सोच थी जो उन्होंने तकरीबन 35 साल पहले अपनी सकारात्मक सोच,बेहतर नजरिये और शानदार सकारात्मक प्रयासों से इसकी बुनियाद रखी थी और इस सपने को साकार करने के लिए व्यापक सुधार भी किए थे।

एक पायलट के जिंदगी ऊंचाई पर होती है। वह खतरों से रोज खेलता है,अपनी जान को रोज दांव पर लगाता है। ऊंचाई पर ही उसकी जिंदगी कभी भी खत्म होने कि आशंकाओं के बीच भी वह सदा मुस्कुराता रहता है। भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जीवन भी कुछ ऐसा ही रहा। इंडियन एयरलाइंस के पायलट राजीव गांधी अचानक सियासत में आये और सर्वोच्च सोपान तक पहुंचे। देश कि भीतरी और बाहरी चुनौतियों का डटकर मुक़ाबला किया और हँसते हँसते बिदा हो गए।  अपनी माँ की आतंकी हमलें मे मौत के तुरंत बाद देश के सबसे युवा प्रधान मंत्री बने राजीव गांधी का राष्ट्र के नाम पहला  संबोधन बेहद नीतिगत विषयों पर केंद्रित था। राष्ट्र और स्वयं के लिए भी बेहद मुश्किल दौर में उन्होने इक्कस्वी सदी के आधुनिक भारत को बनाने के लिए विज्ञान और तकनीक पर बात की। उन्होने मिलजुल कर आगे बढ्ने का संदेश दिया। दरअसल राजीव गांधी दुनिया के किसी भी लोकतंत्र के सबसे युवा प्रधानमंत्री भी थे।



तमाम चुनौतियों के बीच 1985 में वे नई शिक्षा नीति लेकर आए जिसका लक्ष्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करना था वे समाज के सभी वर्गों को शिक्षित कर शैक्षणिक क्रांति से मजबूत आधुनिक भारत बनता देख रहे थे।

बेहद सहज और सरल राजीव अक्सर जनता के बीच होते थे। प्रधानमंत्री होते हुए भी राजीव गांधीको यह कतई पसंद नहीं था कि जहां वे जाएं, उनके पीछे-पीछे उनके सुरक्षाकर्मी भी पहुंचें गृह सचिव आर डी प्रधान बताते है कि एक बार आधी रात को प्रधानमन्त्री राजीव गाँधी स्वयं उन्हें अपनी कार से उन्हें घर छोड़ने के लिए जा रहे थे। विश्व शांति के लिए उनके कदमों और प्रयासों कि संयुक्त राष्ट्र ने भी सराहना कि और उनके प्रगतिशील दृष्टिकोण के लिए उन्हे 1985 में बियाण्ड वार अवार्ड से सम्मानित किया गया।


बेनजीर भुट्टों ने अपनी आत्मकथा में दावा किया है की दक्षिण एशिया और शायद सारी दुनिया हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच रिश्तों का एक नया ही स्वरूप देखता अगर राजीव गाँधी जिंदा रह जाते। भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने अपने कार्यकाल में साहसिक फैसलों से दुनिया को यह एहसास कराया था की भारत जितना विनम्र है,राष्ट्रीय हित और देश की सुरक्षा को लेकर उतना ही आक्रामक भी। इंदिराजी की हत्या के बाद जब राजीव गाँधी प्रधानमंत्री बने तो तो पड़ोसियों से मित्रता या शत्रुता को लेकर किसी भी देश के  प्रति किसी तरह का पूर्वाग्रह उनके मन में नहीं था।लेकिन आपनी माँ की हत्या और खालिस्तान के अनुभव से वह इतना जरुर समझ चुके थे की पड़ोसियों के साथ अनावश्यक नरम रुख को भारत की कमजोरी समझा जा सकता है। युवा राजीव के सामने अपने को भारत के राष्ट्रहित की रक्षा में समर्थ और देश में सर्वमान्य नेता के रूप में प्रस्तुत करने की चुनौती भी थी। यह वहीं दौर था जब चीन,पाकिस्तान,नेपाल,बांग्लादेश और श्रीलंका से हमारे सम्बन्ध बेहद असामन्य थे।

श्रीलंका में तमिलों पर अत्याचारों का अंतहीन सिलसिला चल रहा था और उसे वहां की सिंहली समर्थित सरकार का समर्थन प्राप्त था। ये तमिल भारत के दक्षिण राज्य तमिलनाडू में रहने वाले लोगों के रिश्तेदार थे।जाहिर है राजीव गाँधी के मन में श्रीलंका में रहने वाले तमिलों के वैधानिक अधिकारों को  लेकर बड़ी सहानुभूति थी ।

भारत की समझाईश के बाद भी जब श्रीलंकाई सरकार ने तमिलों के अधिकारों के प्रति गंभीरता नही दिखाई तो राजीव गाँधी ने भारत की साफ्ट नीति को बदल कर श्रीलंका को उन्हीं की भाषा में जवाब देना आरम्भ किया। जनवरी 1985 में  श्रीलंका की एक गश्ती नौका ने भारतीय जल सीमा में प्रवेश कर मछुआरों पर हमला किया जिसमे दो मछुआरे मारे गये ।भारतीय नौसेना ने श्रीलंका की एक सशस्त्र नौका दल को पकड़ लिया और उसके बाद राजीव गाँधी ने श्रीलंका को भारत की सामरिक ताकत का एहसास कराया ।

श्रीलंका में बसने वाले तमिल मूलतः भारतीय और हिन्दू धर्म को मानने वाले है, इन 20 लाख तमिलों में असुरक्षा,अविश्वास और आतंक की भावना विद्यमान थी।तमिलों की सुरक्षा के लिए तमिल आन्दोलन जोरों पर था वहीं फरवरी 1986 में श्रीलंका के राष्ट्र प्रमुख जयवर्धने ने एक साल के भीतर तमिल आन्दोलन को कुचलने की घोषणा कर दी ।इस दौरान पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी आई. एस.आई,इस्राएल की मोसाद और अमेरिका की सी. आई. ए. की श्रीलंका में मौजूदगी के संकेत से दक्षिण की और भारत की सुरक्षा खतरे में पड़ गयी। जाफना प्रायद्वीप में तमिलों की बदतर स्थिति पर गंभीर चिंता प्रकट करते हुए भारत ने श्रीलंका से तुरंत युद्द विराम करने और तमिलों को सहायता देने को कहा।जब श्रीलंका ने इसे अनसुना कर दिया तो  भारत ने श्रीलंका को चेतावनी देते हुए अपने विमानों से जाफना में घुसकर भोजन पैकेट गिराए। अपनी सीमा में भारतीय विमानों के घुसने से सदमे में आये श्रीलंका ने भारत को चेतावनी भी दी  । श्रीलंकाई सरकार की चेतावनी और विरोध को दरकिनार कर भारत ने उसे यह एहसास कराया की भारत अपनी और अपने नागरिकों की  सुरक्षा के लिए किसी भी देश में प्रवेश कर सकता है । भारत की इस कार्यवाही के कारण ही श्रीलंका सरकार ने भारत के समक्ष घुटने टेके और तमिलों पर सैनिक कार्यवाही उसे बंद करनी पड़ी। जवाहरलाल नेहरु की 1954 में चीन यात्रा के 34 वर्ष  बाद राजीव गाँधी ने 1988 में चीन की पांच  दिवसीय यात्रा कर भारत और चीन के बीच 1962 के युद्द से बड़ी कडुवाहट को दूर करते हुए नये संबंधों की शुरुआत की । दुनिया को दो बड़ी जनसँख्या वाले देशों के बीच लम्बे समय से चली आ रही कटुता को दूर करने का राजीव गाँधी का यह अनूठा प्रयास था जिसके जरिये पाकिस्तान और चीन के प्रगाढ़ सम्बन्धों को बेधने की कोशिश के तौर पर देखा गया।


आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की प्रायोजित नीति ,इंदिरा गाँधी की हत्या,पंजाब के आतंकवाद में पाक की भूमिका और जिया उल हक की सैन्य तानाशाही से भारत और पाकिस्तान के सम्बन्ध रसातल में पहुँच गये थे और दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव चरम पर था।ऐसे समय में राजीव गाँधी ने आगे बढकर  दूरदर्शिता पूर्वक पड़ोसी से बेहतर सम्बन्धों को महत्व दिया। उनके इन्हीं प्रयासों की बदौलत  भारत और पाकिस्तान के बीच 10 जनवरी 1986 को पहली बार एक व्यापक व्यापारिक समझौता हुआ और इस प्रकार दोनों देशों के बीच एक नये व्यापारिक संबंधों की शुरुआत हुई                                                                       साथ ही दोनों देशो के बीच एक बार फिर सामाजिक और सांस्कृतिक सम्बन्ध परवान चढ़े। स्वतंत्र भारत के इतिहास में दूसरी बार कोई प्रधानमंत्री पाकिस्तान पहुंचा और उन्होंने पाकिस्तान से एक दुसरे के परमाणु संयंत्रो पर हमला नही करने का समझौता भी किया।                               बहरहाल मजबूत और आधुनिक भारत के लिए  राजीव गाँधी के प्रयासों को हमेशा याद किया जाता है,वे असल में राष्ट्र के राजीव थे।                                       


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brahmadeep alune

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