संदेश

मई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

यदि नेहरु नहीं होते, ydi nehru na hote..

सांध्य प्रकाश                               यदि नेहरु नहीं होते                                                                    डॉ.ब्रह्मदीप अलूने 27 मई 1964,दोपहर के ठीक दो बजे । लोकसभा में केबिनेट मंत्री सी सुब्रमण्यम ने रुंधे गले से अचानक यह घोषणा कि की रोशनी चली गई है,हमारे प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु अब नहीं रहे । संसद में सन्नाटा छा गया । कई सांसद और मंत्री रोने लगे । जैसे जैसे यह समाचार फैला,लोग रोते हुए प्रधानमन्त्री निवास की और भागने लगे । लोगों में निराशा छा गई,बाज़ार बंद हो गए । पूरे भारत में मजदूर,किसान,महिलाएं,बच्चें ,आम नागरिक और सभी वर्गो में यह मायूसी और निराशा फ़ैल गई । ऐसे लाखों लोग अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन करना चाहते थे । आधुनिक भारत के निर्माता जवाहरलाल नेहरु गुलामी से बदहाल भारत को अपने 17 साल के कार्यकाल में आधुनिक और सशक्त भारत की और मार्ग प्रशस्त करते हुए जब बिदा हुए तो उनकी अंतिम यात्रा में शामिल ढाई लाख लोगों की भीड़   बिलख बिलख कर रो रही थी । जून 1920 में प्रतापगढ़ के देहात में नेहरु ने किसानों पर अत्याचार और अमानुषिक व्यवहार की करुण गा

कसौटी पर है संघवाद, kasouty par hai sanghvad

चित्र
      सुबह सवेरे                                                            कसौटी पर है संघवाद                                                                                  डॉ.ब्रह्मदीप अलूने                                                                                    राजनीतिक विश्लेषक चेन्नई में मजदूरी करने वाला हरिया अपनी विकलांग पत्नी को एक लकड़ीनुमा हाथ से खींचने वाली गाड़ी में बिठाता है और भूखा प्यासा बदहवास सा उस गाड़ी को खींचता पैदल चलता जाता है। तमाम परेशानियों से जूझते हुए भी उसकी आँखों में मंजिल पर पहुँचने की ललक है। उसकी मंजिल बहुत दूर है और उसे करीब एक हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करने के बाद मध्यप्रदेश के बालाघाट   पहुँचना होगा। हरिया उस तमिलनाडू को पार करता है जिसे सामाजिक न्याय का बड़ा मॉडल माना जाता है। इसके बाद वह कर्नाटक से गुजरता है जिसका   बैंगलौर दुनिया की आईटी कंपनी का हब है और भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी का यह प्रतीक माना जाता है। उसे तेलंगाना से भी गुजरना है जो पिछड़े से अगड़े बनने का ख्वाब लिए अलग प्रदेश बना है।   इसके बाद हरिया आंध्रप्र

इसीलिए हिंदुस्तानी मुसलमान है सबसे अलहदा ,isliye hindustani muslman hai sbase alhada

चित्र
दबंग दुनिया                   इसीलिए हिंदुस्तानी  मुसलमान है सबसे अलह दा                                                                                                                    डॉ.ब्रह्मदीप अलूने                                                                                                शिक्षाविद   http://epaper.dabangdunia.co/NewsDetail.aspx?storyid=DEL-08-69462450&date=2020-05-25&pageid=1 यह मुहब्बत और इबादत की ईद है लेकिन इस त्योहार तक पहुँचते हुए जो सफर तय हुआ है वह हिंदुस्तान की तारीख में हमेशा याद किया जाएगा। कई धर्मों और संस्कृतियों से भरा हमारा महान लोकतंत्र व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अवधारणाओं की गारंटी देता है। हिंदुस्तान की तारीख में शाही इमाम की रमज़ान की नमाज के दौरान कभी आंखे नम नहीं हुई , लेकिन इस बार ऐसा ही हुआ , हालांकि इसका कारण महामारी का प्रकोप था। रमज़ान के महीने की शामें बड़ी रंगीन और खुशबूदार होती है। इस बार फिजाँ में कोई रंगीनियां नहीं थी। हैदराबाद की होटलों में सैंकड़ों तरह की बिरयानी सजी नहीं थी , बघारे बैंगन और अंचारी सब्जी   भी न नसीब

राष्ट्र के राजीव..rashtra ke rajiv

चित्र
                                   राष्ट्र के राजीव                                                                          डॉ . ब्रह्मदीप अलूने   तरक्की की राह पर रफ्तार से दौड़ते इस देश की युवा पीढ़ी डिजिटल क्रांति के बूते आसमान की ऊँचाइयों को छूती हुई नित नये कीर्तिमान स्थापित कर रही है। अब इस देश में उत्कृष्ट शिक्षा भी है और हम संचार , गैर पारंपरिक ऊर्जा संसाधन , आणविकऊर्जा , सुपरकण्ड्क्टर , कम्प्युटर , बायोटेक्नोलोजी , इलेक्ट्रॉनिक्स , सागर विज्ञान , रक्षा , अंतरिक्ष , क्रायोजेनिक और रक्षा में आत्म निर्भर भी है।   नासा में भी भारतीय है और दुनिया के सबसे उन्नत देश अमेरिका और ब्रिटेन में सबसे ज्यादा डाक्टर भारतीय ही है। दरअसल डिजिटल क्रांति से अभूतपूर्व परिवर्तन वाले इस भारत को ऐसा बनने की पीछे एक युवा प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की व्यापक सोच थी जो उन्होंने तकरीबन 35 साल पहले अपनी सकारात्मक सोच,बेहतर नजरिये और शानदार सकारात्मक प्रयासों से इसकी बुनियाद रखी थी और इस सपने को साकार करने के लिए व्यापक सुधार भी किए थे। एक पायलट के जिंदगी ऊंचाई पर होती है। वह खतरों से रोज खेलता है ,