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कसौटी पर है संघवाद, kasouty par hai sanghvad

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      सुबह सवेरे                                                            कसौटी पर है संघवाद                                                                                  डॉ.ब्रह्मदीप अलूने                                                                                    राजनीतिक विश्लेषक चेन्नई में मजदूरी करने वाला हरिया अपनी विकलांग पत्नी को एक लकड़ीनुमा हाथ से खींचने वाली गाड़ी में बिठाता है और भूखा प्यासा बदहवास सा उस गाड़ी को खींचता पैदल चलता जाता है। तमाम परेशानियों से जूझते हुए भी उसकी आँखों में मंजिल पर पहुँचने की ललक है। उसकी मंजिल बहुत दूर है और उसे करीब एक हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करने के बाद मध्यप्रदेश के बालाघाट   पहुँचना होगा। हरिया उस तमिलनाडू को पार करता है जिसे सामाजिक न्याय का बड़ा मॉडल माना जाता है। इसके बाद वह कर्नाटक से गुजरता है जिसका   बैंगलौर दुनिया की आईटी कंपनी का हब है और भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी का यह प्रतीक माना जाता है। उसे तेलंगाना से भी गुजरना है जो पिछड़े से अगड़े बनने का ख्वाब लिए अलग प्रदेश बना है।   इसके बाद हरिया आंध्रप्र

इसीलिए हिंदुस्तानी मुसलमान है सबसे अलहदा ,isliye hindustani muslman hai sbase alhada

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दबंग दुनिया                   इसीलिए हिंदुस्तानी  मुसलमान है सबसे अलह दा                                                                                                                    डॉ.ब्रह्मदीप अलूने                                                                                                शिक्षाविद   http://epaper.dabangdunia.co/NewsDetail.aspx?storyid=DEL-08-69462450&date=2020-05-25&pageid=1 यह मुहब्बत और इबादत की ईद है लेकिन इस त्योहार तक पहुँचते हुए जो सफर तय हुआ है वह हिंदुस्तान की तारीख में हमेशा याद किया जाएगा। कई धर्मों और संस्कृतियों से भरा हमारा महान लोकतंत्र व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अवधारणाओं की गारंटी देता है। हिंदुस्तान की तारीख में शाही इमाम की रमज़ान की नमाज के दौरान कभी आंखे नम नहीं हुई , लेकिन इस बार ऐसा ही हुआ , हालांकि इसका कारण महामारी का प्रकोप था। रमज़ान के महीने की शामें बड़ी रंगीन और खुशबूदार होती है। इस बार फिजाँ में कोई रंगीनियां नहीं थी। हैदराबाद की होटलों में सैंकड़ों तरह की बिरयानी सजी नहीं थी , बघारे बैंगन और अंचारी सब्जी   भी न नसीब

राष्ट्र के राजीव..rashtra ke rajiv

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                                   राष्ट्र के राजीव                                                                          डॉ . ब्रह्मदीप अलूने   तरक्की की राह पर रफ्तार से दौड़ते इस देश की युवा पीढ़ी डिजिटल क्रांति के बूते आसमान की ऊँचाइयों को छूती हुई नित नये कीर्तिमान स्थापित कर रही है। अब इस देश में उत्कृष्ट शिक्षा भी है और हम संचार , गैर पारंपरिक ऊर्जा संसाधन , आणविकऊर्जा , सुपरकण्ड्क्टर , कम्प्युटर , बायोटेक्नोलोजी , इलेक्ट्रॉनिक्स , सागर विज्ञान , रक्षा , अंतरिक्ष , क्रायोजेनिक और रक्षा में आत्म निर्भर भी है।   नासा में भी भारतीय है और दुनिया के सबसे उन्नत देश अमेरिका और ब्रिटेन में सबसे ज्यादा डाक्टर भारतीय ही है। दरअसल डिजिटल क्रांति से अभूतपूर्व परिवर्तन वाले इस भारत को ऐसा बनने की पीछे एक युवा प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की व्यापक सोच थी जो उन्होंने तकरीबन 35 साल पहले अपनी सकारात्मक सोच,बेहतर नजरिये और शानदार सकारात्मक प्रयासों से इसकी बुनियाद रखी थी और इस सपने को साकार करने के लिए व्यापक सुधार भी किए थे। एक पायलट के जिंदगी ऊंचाई पर होती है। वह खतरों से रोज खेलता है ,

चीन की शह पर उछलता नेपाल

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https://www.jansatta.com/politics/nepal-continues-to-grow-against-india-at-the-instigation-of-china-it-is-dangerous-for-the-country-as-well-as-the-world/1412089/ नेपाली चुनौती का संकट                                                                              ब्रह्मदीप अलूने साम्यवाद की हिंसक और कुटिल विचारधारा का जियो और जीने दो की मानवीय विचारधारा से कोई सामीप्य नहीं हो सकता लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों की विषमताओं और भिन्नताओं के अनुसार राष्ट्रीय हितों की अभिवृद्धि करना किसी भी सम्प्रभू राष्ट्र की मजबूरी होती है। भारत के उत्तर पूर्व में स्थित नेपाल सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है , हिमालय से आने वाली अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करने और अपने पारंपरिक प्रतिद्वंदी चीन को रोकने के लिए भारत के लिए नेपाल से मजबूत संबंध और उसका सुरक्षित रहना अनिवार्य माना जाता है। भारत से सांस्कृतिक , भौगोलिक , आर्थिक और सामाजिक मजबूत सम्बन्धों के बाद भी यह देखा गया है कि नेपाल की वैदेशिक नीति लगातार भारत की सामरिक अनिवार्यता को नजरअंदाज करने को तत्पर रहती है। दरअसल इस समय कालापानी की जमीन को

आत्मनिर्भरता का पहला पाठ गांधी जी का स्वदेशी था - डॉ.ब्रह्मदीप अलूने

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प्रजातन्त्र              गांधी के आचरण और व्यवहार की आत्मनिर्भरता में समाधान है                                                                             डॉ.ब्रह्मदीप अलूने                                                                                       [ गांधी है तो भारत है , पुस्तक के लेखक]   केंब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और इतिहासकार एफ.डब्ल्यू.मीटलैंड अपने छात्रों को अक्सर याद दिलाते रहते थे कि , “जो कुछ भी अतीत है , वह भी कभी भविष्य की बात होगी।” दरअसल आधुनिक भारत की प्रगति के भौतिकवाद के कई दशकों को भोगने के साथ वैश्विक आर्थिक महाशक्ति होने का राजनीतिक दंभ एक महामारी के सामने कुछ महीनों में ही चूर चूर हो गया। महात्मा गांधी भविष्यवक्ता   नहीं थे लेकिन भारत को लेकर उनकी दृष्टि अन्यों के मुक़ाबले साफ और जमीनी थी। पुरानी पीढ़ी के लिए गांधी एक धुंधली याद है वहीं युवा और नव चेतन पीढ़ी के लिए गांधी कोई विवादित रहस्य की तरह प्रगट होते है। इस समय देश की डूबती हुई नैया को पार लगाने के लिए जैसे ही आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की जरूरत महसूस करते हुए इसकी अनुगूंज हुई , वैसे