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श्रीलंका को संतुलित रखने की चुनौती,shrilnka india

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    राष्ट्रीय सहारा                                                                                                                                     चाय,चावल,नारियल और मसालों के अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कड़े  प्रतिस्पर्धी भारत और श्रीलंका सामान्य मामलों में एक दूसरे को प्रतिद्वंदी मानने से परहेज कर सकते है लेकिन तमिलों के मुद्दों को लेकर ऐसा बिल्कुल भी नहीं कहा जा सकता । यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट की श्रीलंका में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन  पर आधारित एक रिपोर्ट को लेकर श्रीलंका चिंतित है और वह  भारत से यह अपेक्षा कर रहा है की भारत श्रीलंका के खिलाफ होने वाले ऐसे प्रस्तावों का विरोध करें ।   इस संबंध में भारत का समर्थन प्राप्त करने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे एक चिट्ठी भारतीय प्रधानमंत्री को  भेज चूके है । श्रीलंका की सामरिक स्थिति हिन्द महासागर की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और भारत इसीलिए श्रीलंका से संतुलित रिश्ते रखना पसंद करता है,लेकिन भारत   के लिए यह इतना आसान भी नहीं है । अतिराष्ट्रवाद और तमिल विरोध को राजनीतिक हथियार बनाकर   श

कांग्रेस के बुजूर्ग रिटायर्ड होने को तैयार नहीं,congress 23

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  मृदुभाषी                 युद्द का सहारा तब लिया जाता है जब राजनीति विफल हो जाती है । कांग्रेस के जी-23 समूह के उम्रदराज नेता इस स्थिति से ही गुजर रहे है ।   कई दिग्गज अपनी राजनीतिक जमीन को खो चूके है,उनके राज्यों में कांग्रेस पस्त है ।   उनकी लोकप्रियता बची नहीं है और वे अपनी अप्रासंगिकता को स्वीकार करने को तैयार नहीं है । राज्यसभा के दरवाजे से विशेष प्रवेश की संभावनाएं भी खत्म हो गई, अत: विरोध का बिगुल उन्हें प्रासंगिक बने रहने के लिए जरूरी लगा, इसलिए उन्होंने वह अंतिम दांव भी खेल दिया ।  राजनीतिज्ञों के लिए धर्म और कर्म का कोई मर्म नहीं होता,उन्हें सब सद्कर्म ही नजर आता है । अब देखिये, कांग्रेस की सत्ता में वरिष्ठ पदों पर रहकर सत्ता,शासन और शक्ति के केंद्र रहे ये दिग्गज बुजूर्ग होकर अब आराम करने की स्थिति में है । लेकिन राजनीतिक हसरतों का क्या करें,वह बूढा होने देने के लिए तैयार  ही नहीं होने देती । जीवन भर धर्मनिरपेक्षता का चोला धारण करने वाले अब अपना राजनीतिक भविष्य को तलाशने के लिए भगवा धारण कर रहे है । सनातन धर्म में केसरिया रंग साधु-संन्यासियों के द्वारा धारण किया जाता

अमेरिका की यमन नीति

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  जनसत्ता                                  राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कूटनीतिक,आर्थिक,सैनिक और मनौवैज्ञानिक साधनों का प्रयोग  बेहद रणनीतिक तरीके से किया जाना चाहिए । अमेरिका   के नए   राष्ट्रपति   जो बाइडेन को अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की गहरी समझ है और ट्रम्प प्रशासन से उलट उनकी नीतियों में यह दिखाई भी दे रहा है । दरअसल बाइडेन ने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के दौरान अरब देशों के साथ किए गए अरबों डॉलर के सैन्य समझौतों की समीक्षा करने की बात कहकर यमन युद्ध में सऊदी अरब के लिए अमेरिकी सहयोग रोकने की घोषणा की है । यमन दक्षिण पश्चिम एशिया का एक ऐसा देश है जो रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है,यह देश पिछले एक दशक से राजनीतिक अस्थिरता और जातीय संघर्ष से बूरी तरह जूझ रहा है । यहां युद्द के मैदान में शिया और सुन्नी ताकतें एक दूसरे के सामने है । पिछले पांच छह सालों से सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन हूथी विद्रोहियों पर हमले कर रहा है । इस गठबंधन   में अमेरिका,ब्रिटेन और फ्रांस जैसे राष्ट्र शामिल है और अब अमेरिका ने यमन समस्या के सैनिक समाधान के   बदले कूटनीतिक प्र

म्यांमार में अब असहयोग आंदोलन,myanmar,ashayog aandolan gandhi

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  राष्ट्रीय सहारा                  यंगून के एक कस्बे से सुले पैगोडा की तरफ बढ़ता हुआ मार्च और इसमें शामिल हजारों शिक्षकों की अहिंसक भीड़ बेखौफ होकर म्यांमार के सैन्य शासन को चुनौती दे रही है । भारत के इस पड़ोसी देश में गांधीवादी नेता आंग सान सू ची की पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी की लोकतांत्रिक सरकार की बहाली और सैन्य शासन के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे है । इनमें भाग लेने वालों में सामान्य जनमानस के साथ विभिन्न सेवाओं में काम करने वाले लोग है । देश में स्वास्थ्य सेवाएं एकदम ठप्प हो गई है, डॉक्टर और नर्सों ने अस्पतालों में जाना बंद कर दिया है । मंडियों और फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर हड़ताल पर चले गए है,वकीलों ने अदालतों का बहिष्कार कर दिया है और वे सैन्य सरकार के खिलाफ रैलियां निकाल रहे है । लोगों ने अपने बच्चों को स्कूल-कॉलेज भेजना बंद कर दिया है । देश की आर्थिक व्यवस्थाएं बूरी तरह चरमरा गई है, बैंकों का कामकाज भी ठप्प पड़ गया है और बैंक अधिकारी ड्यूटी पर नहीं जाकर इन विरोध-प्रदर्शनों में भाग ले रहे है । म्यांमार के यंगून, नेपीडव और मांडले जैसे शहरों के साथ देश के